भुवनेश्वर , जुलाई 17 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान अलग-अलग घटनाओं में इलाज के दौरान मरने वाले दो श्रद्धालुओं की मौत पर गहरा दुख जताया।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से जारी एक बयान में श्री माझी ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

सीएमओे के अनुसार एक बुजुर्ग श्रद्धालु की मौत तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ के कारण दम घुटने के बाद इलाज के दौरान हुई, जबकि एक अन्य श्रद्धालु की मौत एक अलग घटना में इलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हो गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन ने त्योहार के दौरान बीमार पड़ने वाले श्रद्धालुओं की तुरंत मदद की, उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया और बेहतरीन इलाज की व्यवस्था की गई। उन्होंने घायल और बीमार श्रद्धालुओं के जल्द ठीक होने की कामना की और प्रशासन को उचित इलाज और हर ज़रूरी मदद देने का निर्देश दिया।

श्री माझी ने कहा कि पुरी में हालात सामान्य और व्यवस्थित रहे। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच जिन तीन रथों की गुंडिचा मंदिर तक की यात्रा गुरुवार शाम को रोक दी गई थी, उन्होंने शुक्रवार को अपनी यात्रा फिर से शुरू की।

कड़ी सुरक्षा के बीच हज़ारों श्रद्धालुओं द्वारा खींचे जाने के बाद भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ, देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ आखिरकार गुंडिचा मंदिर पहुँच गए।

गुरुवार को तालध्वज रथ बालागंडी के पास रुक गया था, जबकि दर्पदलन रथ नगर निगम बाजार इलाके से आगे नहीं बढ़ पाया था। भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ थोड़ी ही दूर चल पाया था कि सूर्यास्त के समय उसे खींचना रोक दिया गया।

सालाना रथ यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद सभी रस्में काफी हद तक तय समय पर पूरी की गईं।

श्री पाधी ने बताया कि 'पहांडी' जुलूस सुबह 9 बजे शुरू हुआ, जो तय समय सुबह 9.30 बजे से आधा घंटा पहले था। भगवान सुदर्शन, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र का औपचारिक जुलूस आसानी से और समय पर पूरा हुआ।

हालांकि, उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की 'पहांडी' में लगभग डेढ़ घंटे की देरी हुई, क्योंकि देवता 'गुमुटा' के पास करीब 45 मिनट तक रुके रहे। जुलूस के दौरान, सेवादारों ने 'सातपाहाचा' पर फूलों से बने औपचारिक सिर के आभूषण (मुकुट) को हटा दिया क्योंकि वह असामान्य रूप से भारी लग रहा था।

देरी होने को स्वीकार करते हुये श्री पाधी ने कहा कि इसका सटीक कारण नहीं बताया जा सकता, और कहा कि ऐसी घटनाओं को आखिरकार भगवान जगन्नाथ की दैवीय इच्छा माना जाता है।

इस बीच पुलिस ने उन जगहों के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है जहां दो भक्त बेहोश होकर गिर पड़े थे। उनकी पहचान करने और उनके परिवारों को सूचित करने की कोशिशें भी की जा रही हैं।

ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने रथ यात्रा के दौरान भगदड़ मचने की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने गुरुवार रात पुरी में जिला मुख्यालय अस्पताल का दौरा किया था।

उन्होंने बताया कि सांस लेने में तकलीफ़ वाले छह श्रद्धालुओं को अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने उन सभी का इलाज किया, लेकिन इलाज के दौरान 60 साल के एक श्रद्धालु की मौत हो गई। लगभग 35 साल के एक अन्य श्रद्धालु को अस्पताल लाने पर मृत घोषित कर दिया गया।

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