भुवनेश्वर , जुलाई 08 -- ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई.बी. खुराना ने बुधवार को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी मामलों को तेजी सुलझाने के लिए ई-ज़ीरो प्राथमिकी प्रणाली का शुभारंभ किया।
यह नयी प्रणाली शिकायतों को तुरंत दर्ज करने, पुलिस की त्वरित कार्रवाई को आसान बनाने और आगे के वित्तीय नुकसान को रोकने की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए बनायी गयी है। यह पहल तेज़, ज़्यादा पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के लिए तकनीकी का इस्तेमाल करने की ओडिशा पुलिस की कोशिशों में एक अहम पड़ाव है। इस प्रणाली को चालू करने के लिए, राज्य अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एससीआरबी) ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 को ओडिशा के अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क (सीसीटीएनएस) के साथ जोड़ा है।
नयी व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के ज़रिए रिपोर्ट की गयी 10 लाख रुपये और उससे ज़्यादा के साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों के लिए सीसीटीएनएस में अपने आप एक ई-ज़ीरो प्राथमिकी दर्ज हो जायेगी और इसे ओडिशा अपराध शाखा के साइबर पुलिस को भेजा जायेगा।
श्री खुराना ने कहा कि ओडिशा पुलिस साइबर अपराध से निपटने के तरीकों को मज़बूत करने और समय पर, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल पुलिसिंग देने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के ज़रिए साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्ट करने का आग्रह किया और कहा कि तुरंत रिपोर्ट करने से पुलिस की कार्रवाई और ठगी गयी रकम की बरामदगी की संभावना काफी बढ़ जाती है।
डीजीपी ने ई-जीरो प्राथमिकी प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने में किये गये समन्वित प्रयासों के लिए राज्य अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो, अपराध शाखा और सभी संबंधित पक्षों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।
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