भुवनेश्वर , अप्रैल 07 -- ओडिशा के बारगढ़ जिला स्थित देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य तेजी से इको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है।

वन विभाग के अनुसार, 2025-26 वित्त वर्ष में देब्रीगढ़ इको-टूरिज्म स्थलों ने 6.02 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि करीब 1.4 लाख पर्यटक यहां पहुंचे। इनमें 50,000 से अधिक विदेशी पर्यटक इटली, फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, वेस्ट इंडीज, जर्मनी, फिनलैंड, आयरलैंड, स्पेन और ब्राज़ील से आए। यह आंकड़े 2024-25 की तुलना में अधिक हैं।

देब्रीगढ़ अब एक प्रमुख वन्यजीव गंतव्य के रूप में विकसित हो चुका है, जहां भारतीय बाइसन (गौर), तेंदुआ, जंगली कुत्ता, सांभर, चीतल, स्लॉथ भालू, जंगली सूअर, मोर और विभिन्न पक्षियों का नजर आना सुनिश्चित माना जाता है।

श्री अंशु प्रज्ञान दास (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) ने बताया कि यहां इको-टूरिज्म संरक्षण और सामुदायिक विकास के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में उभरा है। इससे वन-आश्रित समुदायों को स्थायी रोजगार मिल रहा है और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम हुआ है।

उन्होंने कहा कि करीब 120 परिवार अब नेचर गाइड, सफारी ड्राइवर, बोट ऑपरेटर, होमस्टे संचालक और इको-फ्रेंडली सुविधाओं में काम कर रहे हैं। 'धोद्रोकुसुम होमस्टे', बर्डिंग ट्रेल और 'आइलैंड कैफे' जैसी पहलें आय और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रही हैं।

विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। लगभग 40 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है, जिनमें महिला सफारी ड्राइवर, इको-गाइड और होमस्टे संचालक शामिल हैं। कई होमस्टे पूरी तरह आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो अपने परिवार की मुख्य कमाने वाली बन गई हैं।

राजस्व आंकड़ों के अनुसार, 35 प्रतिशत राशि समुदाय के वेतन, 25 प्रतिशत संचालन खर्च, 10 प्रतिशत बुनियादी ढांचे के विकास, 10 प्रतिशत गांवों के विकास और 20 प्रतिशत राशि प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण के लिए कोष में जाती है।

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