भुवनेश्वर , अक्टूबर 21 -- पूर्व केंद्रीय मंत्री और संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे कोटिया सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ओड़िया पहचान की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्री प्रधान ने कोटिया को ओडिशा की पहचान, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का प्रतीक बताते हुए राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे दलीय मतभेदों से ऊपर उठें और इस विवाद के स्थायी और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए काम करें।
भाजपा सांसद ने कहा कि राजनीतिक हितों से ऊपर ओडिशा के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से उच्च स्तर पर सार्थक चर्चा करने का आह्वान किया।
श्री प्रधान ने बताया कि उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेने के लिए अप्रैल 2018, फरवरी 2019 और अप्रैल 2023 में व्यक्तिगत रूप से कोटिया का दौरा किया था। पूर्व मंत्री ने बताया कि इस विवाद के कारण बार-बार पैदा होने वाली समस्याओं और इस क्षेत्र में आंध्र प्रदेश के कथित हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को 18 नवंबर 2020 और 31 अक्टूबर 2022 को पत्र लिखा था।
श्री प्रधान ने कहा कि उन्होंने 22 सितंबर 2021 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी को भी पत्र लिखकर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था।
उन्होंने राज्य के हितों की रक्षा करने में राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए सीमा विवाद का ऐसा समाधान निकालने के लिए निरंतर बातचीत और समन्वित प्रयासों का आह्वान किया, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो और लंबे समय तक कायम रहे।
श्री प्रधान ने ओडिशा की भौगोलिक अखंडता की रक्षा में योगदान देने वाली महान हस्तियों को भी श्रद्धांजलि दी। इनमें उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास, व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति, स्वभाव कवि गंगाधर मेहेर और पराला महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति नारायण देव शामिल थे।
उन्होंने कहा कि उनके बलिदान और योगदान कभी व्यर्थ नहीं जाएंगे। साथ ही, उन्होंने दोहराया कि ओड़िया पहचान को बनाए रखने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। श्री प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि ओडिशा की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है, जिसमें सभी राजनीतिक दल मिलकर 'कोटिया विवाद' को सुलझाने के लिए काम करें।
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