भुवनेश्वर , अक्टूबर 27 -- ओडिशा प्रदेश कांग्रेस समिति (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रताड़ना, अवैध हिरासत और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर मामलों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से गृह विभाग के प्रभार से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मंगलवार को जारी विस्तृत बयान में आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और अपराध पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
श्री दास ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो (एनसीआईबी) के ओडिशा राज्य निदेशक ने 23 जून को केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर राज्य में पुलिस प्रताड़ना और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की सिफारिश की थी।
इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 16 सितंबर को राज्य के मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके आधार पर 16 अक्टूबर को राज्य गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) से इस पूरे मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।
श्री दास ने कहा कि इन घटनाक्रमों ने राज्य की पुलिस प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री माझी की 30 अगस्त को शुरू की गई 10-सूत्रीय 'स्मार्ट पुलिसिंग' योजना पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। मुख्यमंत्री ने 'अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस' तथा नागरिक-अनुकूल पुलिसिंग का वादा किया था, लेकिन धरातल पर स्थितियां इसके ठीक उलट हैं।
आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री दास ने बताया कि ओडिशा में वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में दर्ज अपराधों में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, कमिश्नरेट पुलिस के आंकड़ों के अनुसार राजधानी भुवनेश्वर में जनवरी से जून 2026 के बीच 9,934 गंभीर आपराधिक मामले (चोरी, धोखाधड़ी, डकैती और हत्या) दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 6,968 मामलों की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं पुलिस का तर्क है कि इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मामले मामूली या अहिंसक श्रेणी के हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में हिंसक अपराध की दर 161.6 पीड़ित प्रति लाख आबादी (कुल 75,403 मामले) तक पहुंच गई है। उन्होंने चिंता जताते हुए बताया कि जून 2024 से जुलाई 2026 के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराध के 71,769 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में नाबालिगों की संलिप्तता में भी 38 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जो यह दर्शाता है कि नाबालिगों का इस्तेमाल आपराधिक नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है।
श्री दास ने यह भी आरोप लगाया कि महानिदेशक के शीर्ष पद पर नियुक्ति के दौरान राजनीतिक प्राथमिकताओं को तबज्जो देने के कारण राज्य में पुलिस की कार्यप्रणाली और पर्यवेक्षण बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे आम जनता की सुरक्षा राम भरोसे हो गई है।
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