भुवनेश्वर , जुलाई 25 -- भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और हाइड्रोकार्बन आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन (एप्रेज़ल) कुएं एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी की ड्रिलिंग शनिवार को शुरू हो गयी।

यह चार प्रस्तावित गहरे समुद्री मूल्यांकन कुओं में पहला है, जिसके माध्यम से महानदी अपतटीय बेसिन में हाइड्रोकार्बन की संभावनाओं का क्रमबद्ध आकलन किया जाएगा। इस बेसिन को भारत के सबसे संभावनाशील अपतटीय अन्वेषण क्षेत्रों में से एक माना जाता है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में नये अध्याय की शुरुआत बताया है और कहा कि ड्रिलिंग कार्य का आरंभ पिछले एक दशक में किये गये सुधारों का परिणाम है, जिन्होंने देश के अन्वेषण एवं उत्पादन (ई एंड पी) क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाये हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में अत्याधुनिक गहरे समुद्र की ड्रिलिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे नये हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पता लगाने और देश के तेल एवं गैस उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

श्री पुरी ने कहा कि सरकार ने पिछले 10 वर्षों में नीतिगत और नियामकीय सुधारों के जरिए अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र की पूरी व्यवस्था में व्यापक बदलाव किये हैं। इनमें हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (एचईएलपी) लागू करना, नामांकन आधारित आवंटन प्रणाली के स्थान पर ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (ओएएलपी) शुरू करना, पारदर्शी राजस्व साझेदारी मॉडल अपनाना तथा पहले प्रतिबंधित रहे देश के लगभग 99 प्रतिशत अपतटीय 'नो-गो' क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए खोलना शामिल है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से देश के सक्रिय अन्वेषण क्षेत्र का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया है, जो इन सुधारों के बाद हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

श्री पुरी ने वैज्ञानिक अन्वेषण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि सरकार ने मिशन अन्वेषण, राष्ट्रीय भूकंपीय कार्यक्रम, विस्तारित महाद्वीपीय शेल्फ सर्वेक्षण, राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी तथा हाइड्रोकार्बन संसाधन आकलन अध्ययन जैसी पहलों के माध्यम से भू-विज्ञान संबंधी आंकड़ों के सृजन में लगातार निवेश किया है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से देश के सीमांत बेसिनों में संसाधनों की खोज के लिए विश्व के सबसे व्यापक भू-विज्ञान डाटाबेस में से एक तैयार हुआ है।

श्री पुरी ने बताया कि ओएएलपी के तहत लगभग 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 172 अन्वेषण ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक 674 कुओं की ड्रिलिंग की गयी, पांच नये हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज हुई तथा सात खोजों से उत्पादन शुरू किया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति नये हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज के साथ-साथ मौजूदा क्षेत्रों से अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इसके लिए पुराने उत्पादन क्षेत्रों को भी आधुनिक तकनीक और वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा रहा है, ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।

केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सतत नीतिगत सुधारों, वैज्ञानिक अन्वेषण, तकनीकी नवाचार तथा भूवैज्ञानिकों, अभियंताओं, वैज्ञानिकों और अपतटीय क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के सामूहिक प्रयासों से सुनिश्चित होगी।

श्री पुरी ने कहा, "आज पहले कुएं की ड्रिलिंग शुरू करके हम केवल समुद्र तल की खुदाई नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के भविष्य की नींव रख रहे हैं। ड्रिलिंग का प्रत्येक मीटर हमें आयात पर निर्भरता कम करने, आत्मनिर्भरता मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य के और करीब ले जाएगा।"उन्होंने ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी), ऑयल इंडिया लिमिटेड, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय, तकनीकी साझेदारों तथा अन्वेषण क्षेत्र से जुड़े सभी पेशेवरों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि महानदी अपतटीय बेसिन में ड्रिलिंग की शुरुआत से भारत के अपतटीय अन्वेषण कार्यक्रम को और गति मिलेगी तथा देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।

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