जयपुर , मार्च 17 -- राजस्थान के जयपुर में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर की अधीनस्थ इकाई राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (रारी), दुर्गापुरा में मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया से आए 20 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भ्रमण कर यहां संचालित उन्नत कृषि अनुसंधान एवं तकनीकों का अवलोकन किया।
इस अंतरराष्ट्रीय भ्रमण कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों, अनुसंधान गतिविधियों, जलवायु अनुकूल खेती तथा टिकाऊ कृषि मॉडलों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना रहा।
इस अवसर पर रारी के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह मनोहर ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों, चल रही अनुसंधान परियोजनाओं, नवाचारों एवं किसानों के हित में विकसित तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रारी, दुर्गापुरा द्वारा विकसित तकनीकें न केवल उत्पादन वृद्धि में सहायक हैं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं सतत कृषि विकास को भी प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय भ्रमण कार्यक्रम ज्ञान, अनुभव एवं तकनीकी आदान-प्रदान के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर किसानों के बीच सहयोग को भी सुदृढ़ करते हैं।
भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने चना, बागवानी फसलों तथा एकीकृत कृषि प्रणाली पर संचालित अनुसंधान कार्यों का निरीक्षण किया। किसानों ने विभिन्न अनुसंधान प्रक्षेत्रों, फील्ड ट्रायल्स एवं प्रदर्शन इकाइयों का अवलोकन करते हुए वैज्ञानिकों से उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। विशेष रूप से एकीकृत कृषि प्रणाली, उन्नत किस्मों, पोषक तत्व प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों में उन्होंने गहरी रुचि दिखाई तथा इन तकनीकों को अपने देश में अपनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान में हो रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना करते हुए इन्हें अत्यंत व्यावहारिक, नवाचारपूर्ण एवं किसान हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अनुसंधान एवं तकनीकी हस्तांतरण से वैश्विक कृषि प्रणाली को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने भारतीय कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों को ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियों में अपनाने की संभावनाओं पर भी सकारात्मक चर्चा की।
यह भ्रमण कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के किसानों के बीच ज्ञान, अनुभव एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित