सोनीपत , मई 20 -- देश भर में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में बुधवार को आयोजित 24 घंटे की प्रतीकात्मक हड़ताल के दौरान सोनीपत में करीब 1,000 मेडिकल स्टोर बंद रहे। हरियाणा के अन्य जिलों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए। गंभीर मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।

हड़ताल को जिला रसायनज्ञ एवं औषधि विक्रेता संघ का समर्थन मिला। संघ ने बताया कि दवा व्यापार से जुड़ी लंबित मांगों और बढ़ती चुनौतियों के कारण राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया गया। संगठन के अनुसार देशभर में 12.4 लाख से अधिक केमिस्ट और वितरक इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जबकि चार से पांच करोड़ लोगों की आजीविका इस व्यापार पर निर्भर है।

सोनीपत जिला केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश काडियान ने बताया कि 11 मई को खाद्य एवं औषधि प्रशासन, सोनीपत के औषधि नियंत्रण अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था। इसमें राज्य और केंद्र सरकार से दवा व्यापार को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की गई।

संघ ने आरोप लगाया कि अवैध ई-फार्मेसी संचालन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक दवा वितरण प्रणाली प्रभावित हो रही है। संगठन ने 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना जीएसआर 817(ई) और 26 मार्च 2020 की अधिसूचना जीएसआर 220(ई) को वापस लेने की मांग भी उठाई।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि बिना वैध पर्चे के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही है। उनका आरोप है कि बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां भारी छूट और अनुचित मूल्य निर्धारण के जरिए छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों को नुकसान पहुंचा रही हैं।

संगठन ने एंटीबायोटिक्स और नशा पैदा करने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता, फर्जी पर्चों के इस्तेमाल, फार्मासिस्ट और मरीजों के बीच संवाद की कमी, नकली दवाओं के खतरे और रोगाणुरोधी प्रतिरोध बढ़ने पर भी चिंता जताई।

दवा विक्रेताओं ने सरकार से जन स्वास्थ्य और मेडिकल स्टोर संचालकों की आजीविका की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।

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