बेंगलुरु , जून 20 -- कर्नाटक की महत्वाकांक्षी 'गृहलक्ष्मी' योजना शनिवार को तब विवादों के घेरे में आ गई जब भाजपा ने वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर इशारा करने वाले ऑडिट निष्कर्षों का हवाला दिया और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग की।

यह योजना कांग्रेस सरकार के गारंटी एजेंडे के प्रमुख कल्याणकारी कार्यक्रमों में गिनी जाती थी।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) के ऑडिट में रेखांकित किये गये निष्कर्षों ने इस योजना के कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। यह योजना परिवार की महिला मुखियाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करती है और कांग्रेस इसे कल्याणकारी शासन के एक मॉडल के रूप में पेश करती रही है।

श्री अशोक के अनुसार, ऑडिट में लाभार्थियों के बैंक खाते के विवरण के बिना 46.52 करोड़ रुपये के वितरण को चिन्हित किया गया है। ऑडिट में यह भी पाया गया है कि 19,020 लाभार्थी एक जैसे ही बैंक खाता नंबरों से जुड़े हुये थे। उन्होंने दावा किया कि इन टिप्पणियों से संभावित फर्जी लाभार्थियों, धोखाधड़ी वाले लेनदेन और सत्यापन प्रक्रिया में कमियों का पता चलता है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि 10 लाख से अधिक लाभार्थियों के रिकॉर्ड में कई बार बदलाव किये गये थे, जिससे डेटाबेस में हेरफेर की संभावना बढ़ गई और योजना की सत्यनिष्ठा पर भरोसा कमजोर हुआ है।

इन आरोपों ने कांग्रेस सरकार की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कल्याणकारी पहलों में से एक को सुर्खियों में ला दिया है। यह योजना कांग्रेस के बहुप्रचारित गारंटी कार्यक्रम का एक प्रमुख स्तंभ है।

कांग्रेस इन गारंटियों को बार-बार अपने शासन मॉडल के प्रमाण के रूप में प्रदर्शित करती रही है।

इन गारंटियों को भ्रष्टाचार का मॉडल बताते हुए श्री अशोक ने आरोप लगाया कि सामने आई अनियमितताओं ने निगरानी और कार्यान्वयन में व्यवस्थागत खामियों को उजागर किया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस साल की शुरुआत में कथित तौर पर चिंता जताए जाने के बावजूद सुधारात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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