हैदराबाद , जुलाई 12 -- ऑटिज्म से पीड़ित लोगों की देखभाल केवल शुरुआती पहचान और बचपन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि किशोरावस्था, वयस्क जीवन और बुजुर्गावस्था तक निरंतर सहयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

हैदराबाद के रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'ऑटिज्म ओडिसी 3.0' में विशेषज्ञों ने ये राय जाहिर की।

रविवार को संपन्न हुए इस सम्मेलन में भारत और विदेशों से एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें विकास संबंधी शिशु रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक, थेरेपिस्ट, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल थे। सम्मेलन में ऑटिज्म की पहचान, उपचार, हस्तक्षेप और दीर्घकालिक देखभाल में हुए नवीनतम विकास पर चर्चा की गई।

सम्मेलन का आयोजन मरहम, अली यावर जंग राष्ट्रीय श्रवण दिव्यांग संस्थान तथा इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के सहयोग से किया गया। इसका उद्घाटन रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार चिरला, आईआईपीएच के कुलपति डॉ. एम. विष्णु वर्धन राव तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि ऑटिज्म एक आजीवन विकसित होते रहने वाली स्थिति है, जिसके लिए परिवार के सहयोग और समन्वित देखभाल की जरूरत होती है।

मुख्य वक्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध ऑटिज्म विशेषज्ञ प्रो. डॉ. टेम्पल ग्रैंडिन ने ऑटिज्म से पीड़ित लोगों की क्षमताओं को पहचानने और उनके लिए ऐसा वातावरण तैयार करने पर बल दिया, जिससे उन्हें स्वीकार्यता, आत्मनिर्भरता और अवसर मिल सकें।

सम्मेलन में किम बार्थेल, एम्स की डॉ. शेफाली गुलाटी, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के डॉ. सत्य राज, डॉ. प्रतिभा कारंथ और डॉ. नंदिता डिसूजा सहित अन्य विशेषज्ञों ने ऑटिज्म की पहचान, न्यूरोसाइंस, संचार, संवेदी एकीकरण और दीर्घकालिक सहयोग से जुड़े नवीनतम शोध और अनुभव साझा किये।

सम्मेलन के दौरान पांच व्यावहारिक कार्यशालाएं तथा बाल रोग विशेषज्ञों के लिए विशेष 'ऑटिज्म मास्टरक्लास' का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य ऑटिज्म की शीघ्र पहचान, विकास संबंधी निगरानी और समय पर विशेषज्ञों के पास रेफरल की प्रक्रिया को मजबूत बनाना था।

वैज्ञानिक सत्रों में प्रारंभिक पहचान, व्यवहार प्रबंधन, संचार कौशल, किशोरावस्था, लैंगिकता, स्वतंत्र जीवन और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सम्मेलन की संयोजक एवं विकास संबंधी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा गिरी ने कहा कि ऑटिज्म देखभाल को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षकों, नीति-निर्माताओं, गैर-सरकारी संगठनों और परिवारों के बीच बहु-विषयक सहयोग आवश्यक है।

रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में न्यूरोसाइंसेज विभाग के प्रमुख डॉ. रमेश कोनांकी ने बाल रोग विशेषज्ञों से विकासात्मक जांच के माध्यम से ऑटिज्म की शीघ्र पहचान कर समय पर विशेषज्ञों के पास भेजने पर जोर दिया।

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