पटना , सितंबर 20 -- ाज्य सरकार अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) तथा अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) वर्ग के मछली पालकों को सहायता पैकेज के रूप में भारी अनुदान देने जा रही है। इसी कड़ी में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विशेष घटक पैकेज योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं।
इस योजना का संचालन राज्य केएससी, एसटी और ईबीसी के मत्स्य कृषकों को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को तालाब निर्माण, बोरिंग पंपसेट/समरसेबुल, ट्यूबवेल या सोलर पंपसेट के अधिष्ठापन, मत्स्य इनपुट, शेड निर्माण तथा यांत्रिक ऐरेटर जैसी सहायक इकाइयों के लिए एकमुश्त 'पैकेज सहायता' दी जा रही है।
योजना को दो प्रमुख घटकों में बांटा गया है। पहली तालाब मात्स्यिकी विशेष सहायता योजना है, जिसमें अधिकतम 10 लाख 10 हजार रुपये प्रति इकाई लागत पर 70 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। दूसरी पठारी क्षेत्र तालाब निर्माण आधारित योजना है, जिसमें अधिकतम 16 लाख 70 हजार रुपये प्रति इकाई लागत पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।
दोनों योजनाओं का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 0.4 एकड़ जलक्षेत्र की यूनिट के लिए आवेदन करना होगा।तालाब मात्स्यिकी योजना राज्य के सभी जिलों के अनुसूचित जाति, जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग के लिए लागू है। वहीं, पठारी क्षेत्र योजना दक्षिण बिहार के चिन्हित पठार बाहुल्य जिलों बांका, औरंगाबाद, गया, कैमूर, नवादा, जमुई, मुंगेर, रोहतास और लखीसराय के एससी/एसटी मत्स्य पालकों के लिए विशेष रूप से क्रियान्वित की जा रही है।
आवेदक के पास निजी या न्यूनतम 09 वर्षों की लीज वाली भूमि होना अनिवार्य है। आवेदन के साथ भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र (एलपीसी) / अद्यतन मालगुजारी रसीद या 1,000 रुपये के नॉन- ज्यूडिशियल स्टाम्प पर लीज एकरारनामा संलग्न करना होगा। इसके अलावा बैंक खाता विवरण, आईएफएससी कोड, जाति प्रमाण पत्र, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड/मतदाता पहचान पत्र तथा जमीन का नक्शा स्व-अभिप्रमाणित कर जमा करना होगा।
इच्छुक मत्स्य पालक योजना का लाभ उठाने के लिए विभागीय पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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