पटना , अप्रैल 01 -- ाउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) के सभी 65 कार्यालयों में जीविका के सामुदायिक संगठनों की ओर से संचालित साफ-सफाई इकाईयों का उद्घाटन निदेशक (उद्यम), जीविका, विनय कुमार राय ने किया। इस अवसर पर निदेशक, जीविका, राम निरंजन सिंह, विशेष कार्य पदाधिकारी, जीविका, राजेश कुमार तथा जीविका के अन्य कर्मियों के साथ एसबीपीडीसीएलसे भी गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अब उन र्कायालयों में साफ-सफाई का कार्य जीविका दीदियों द्वारा किया जाएगा। यह पहल बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) और एसबीपीडीसीएल के मध्य हुए समझौता ज्ञापन के तहत शुरू की जा रही है। इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल साफ-सफाई सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि सैकड़ों जीविका दीदियों को स्थायी रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।
उल्लेखनीय है कि जीविका दीदियाँ पहले से ही विभिन्न सरकारी संस्थानों में अपनी सेवाएँ सफलतापूर्वक प्रदान कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार के साथ हुए समझौते के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों एवं अनुमंडल अस्पतालों में साफ-सफाई का कार्य जीविका दीदियों द्वारा कुशलतापूर्वक किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, राज्य के सभी आवासीय अनुसूचित जाति/जनजाति विद्यालयों, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग के आवासीय विद्यालयों तथा अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में भी यह जिम्मेदारी जीविका दीदियों द्वारा निभाई जा रही है।
इसी क्रम में, नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के सभी कार्यालयों में भी साफ-सफाई की सेवाएँ जीविका दीदियों द्वारा प्रदान की जा रही हैं, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
वर्तमान में राज्य भर में 700 से अधिक इकाइयों में जीविका दीदियाँ साफ-सफाई सेवाएँ प्रदान कर रही हैं, जिससे 7000 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है। इन दीदियों की मासिक आय 8,000 से 12,000 तक है, जो उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और सेवा गुणवत्ता में सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।एसबीपीडीसीएल के साथ इस नई साझेदारी से न केवल रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा, बल्कि जीविका दीदियों की भूमिका और भी सशक्त होगी। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य विभागों और संस्थानों में भी लागू करने की योजना है, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
इस पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ा जा रहा है।
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