कानपुर , अक्टूबर 28 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) ने एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से 30 नवाचार आधारित स्टार्टअप को कुल 2.64 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की है।

'एसबीआईएफ लीप : इनोवेटर्स फॉर भारत' कार्यक्रम के तहत कृषि प्रौद्योगिकी, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप को आर्थिक सहायता, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और निवेशकों व उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इस पहल के तहत हाल ही में आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में 'एसबीआईएफ लीप : इनोवेटर्स फॉर भारत डेमो डे एंड इन्वेस्टर कनेक्ट' कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्टार्टअप संस्थापकों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और नवाचार क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया। स्टार्टअप ने अपने उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करने के साथ निवेश तथा व्यावसायिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

भारतीय स्टेट बैंक की सामाजिक उत्तरदायित्व इकाई एसबीआई फाउंडेशन द्वारा समर्थित और एसआईआईसी, आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवाचार आधारित समाधानों को विकसित करने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने में मदद करना है। इसके तहत कृषि, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जमीनी चुनौतियों के समाधान पर काम किया जा रहा है।

कार्यक्रम के प्रभाव आकलन के अनुसार, इससे जुड़े स्टार्टअप के प्रयासों से 8,000 से अधिक किसानों और 960 से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है। इनके माध्यम से 195 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिला है। स्टार्टअप के नवाचारों से 2,000 टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन रोकने में मदद मिली है।

स्वच्छ ऊर्जा और कृषि अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में इन स्टार्टअप ने 3,000 टन से अधिक कृषि अपशिष्ट से स्वच्छ जैव ईंधन तैयार किया है। इसके अलावा, पराली जलाने से 800 एकड़ कृषि भूमि को बचाने में मदद मिली है। ये प्रयास कृषि अपशिष्ट के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप ने 4,000 से अधिक लोगों को जांच और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। कार्यक्रम से जुड़े स्टार्टअप ने आठ से अधिक पेटेंट के लिए आवेदन किया है या पेटेंट हासिल किए हैं। वहीं, सात स्टार्टअप की संस्थापक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी महिलाएं हैं। ये उपलब्धियां तकनीक आधारित उद्यमों के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव को रेखांकित करती हैं।

कार्यक्रम के तहत कृषि प्रौद्योगिकी क्षेत्र के 20, स्वच्छ प्रौद्योगिकी के पांच और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के पांच स्टार्टअप को सहायता दी गई है। शुरुआती चरण के 24 स्टार्टअप को आठ-आठ लाख रुपये और विकास के अगले चरण में पहुंच चुके छह स्टार्टअप को 12-12 लाख रुपये दिए गए हैं। इस प्रकार कुल 2.64 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता उपलब्ध कराई गई है।

स्टार्टअप की व्यावसायिक प्रगति के आकलन में सामने आया कि नौ स्टार्टअप ने कमाई, नए ग्राहक बनाने या भुगतान के आधार पर अपने उत्पादों का परीक्षण करने के जरिए कारोबार को आगे बढ़ाया है। दस स्टार्टअप अन्य कंपनियों के साथ मिलकर अपने उत्पादों का परीक्षण कर रहे हैं और आवश्यक अनुमतियां हासिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। वहीं, 11 स्टार्टअप ने अपने उत्पादों के शुरुआती नमूने तैयार कर लिए हैं और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल के लिए तैयार कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान सभी 30 स्टार्टअप के नवाचारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। एसबीआई फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी प्रत्युष मेहरोत्रा ने निवेशकों और एसआईआईसी, आईआईटी कानपुर की टीम के साथ प्रदर्शनी में प्रत्येक स्टॉल का दौरा किया। उन्होंने स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत कर उनके काम, उत्पादों और समाधानों की उपयोगिता के बारे में जानकारी ली।

स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में निवेश की भूमिका को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में आठ स्टार्टअप की 14 निवेश संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का उद्देश्य स्टार्टअप को निवेशकों से जोड़ना और उनके समाधानों के व्यावसायिक विस्तार की संभावनाओं को आगे बढ़ाना था।

'इनोवेटर्स फॉर भारत' कार्यक्रम के तहत आर्थिक सहायता के साथ व्यवस्थित मार्गदर्शन, विशेषज्ञों की सलाह और उद्योग जगत से संपर्क के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे शुरुआती चरण के उद्यमों को अपने उत्पादों की उपयोगिता परखने, आवश्यक परीक्षण और अनुमतियां हासिल करने तथा बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।

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