शिमला , मार्च 31 -- स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की नवीनतम अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में उजागर हुई गंभीर अनियमितताओं का हवाला देते हुए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है।
मार्च 2023 की समाप्त होने वाली अवधि के लिए तैयार की गई और 30 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई यह रिपोर्ट, विश्वविद्यालय में भर्ती, शैक्षणिक मानकों और संस्थागत कामकाज में महत्वपूर्ण खामियों की ओर इशारा करती है।
एसएफआई की हिमाचल प्रदेश राज्य समिति के निष्कर्षों के अनुसार, 2020-23 के दौरान एचपीयू में शिक्षकों की 27 से 37 प्रतिशत सीटें खाली थीं, जो शैक्षणिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ी करती है। ऑडिट में 186 नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में दस्तावेज सत्यापन सहित उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
रिपोर्ट में अनियमित भर्ती के उदाहरणों पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों के उल्लंघन में एक अपात्र सहायक प्रोफेसर और एक अतिथि संकाय सदस्य की नियुक्ति शामिल है।
एसएफआई के राज्य सचिव सन्नी सेक्टा द्वारा जारी अपने प्रेस बयान में कहा गया है कि इन खामियों ने शैक्षणिक मानकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि पहले की चेतावनियों के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन प्रणालीगत कमियों को दूर करने में विफल रहा।
ऑडिट ने खराब शोध आउटपुट को भी रेखांकित किया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि तीन वर्षों में 214 संकाय सदस्यों द्वारा केवल 21 शोध परियोजनाएं शुरू की गईं, जो प्रति शिक्षक औसतन केवल 0.1 परियोजना है। यह निर्धारित मानदंडों से काफी नीचे है।
इसके अतिरिक्त, उद्योगों के साथ हस्ताक्षरित 24 समझौता ज्ञापनों में से केवल पांच ही कार्यात्मक पाए गए, जिससे छात्रों के अनुभव और प्लेसमेंट के अवसर सीमित हो गए।
रिपोर्ट में देखा गया कि यूजीसी द्वारा वित्तपोषित 16 में से 11 पीठ (चेयर) अधिसूचना के 25 साल बाद भी कार्य नहीं कर रहे हैं, जो गहरी प्रशासनिक अक्षमताओं को दर्शाती हैं।
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