अमृतसर , जून 11 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता एवं सिख चिंतक प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने जीटीसी नेटवर्क के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रबिंदर नारायण द्वारा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को बिना किसी वित्तीय बोझ के समर्पित 24 घंटे के वैश्विक सैटेलाइट एवं डिजिटल चैनल स्थापित करने संबंधी प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होंने एसजीपीसी से इस प्रस्ताव पर तत्काल और गंभीरता से विचारकरने की अपील की।
प्रो. ख्याला ने गुरुवार को कहा कि विश्वभर में बसे सिख लंबे समय से ऐसे स्वतंत्र मीडिया प्लेटफॉर्म की मांग कर रहे हैं, जो गुरबाणी, गुरमत विचारधारा,सिख इतिहास, पंथक सरोकारों और सिख संस्थाओं की गतिविधियों को प्रामाणिक एवं मर्यादित ढंग से वैश्विक स्तर पर प्रसारित कर सके। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी द्वारा अपने स्वतंत्र सेटेलाइट चैनल की स्थापना के लिए अतीत में कई प्रयास किये गये, लेकिन यह सपना अभी तक साकार नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा भी समय-समय पर एसजीपीसी को इस दिशा में पहल करने के निर्देश दिये जाते रहे हैं। ऐसे में यदि प्रसारण क्षेत्र के किसी अनुभवी विशेषज्ञ द्वारा व्यावहारिक और सार्थक प्रस्ताव दिया जाता है, तो उसे बिना विचार किए खारिज करने के बजाय पंथक हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष रूप से परखा जाना चाहिए।
प्रो ख्याला ने कहा कि अतीत में गुरबाणी प्रसारण को लेकर एक निजी चैनल को लंबे समय तक अधिकार दिये जाने के कारण एसजीपीसी विवादों में रही है। सिख संगत के बड़े वर्ग ने गुरबाणी प्रसारण पर किसी भी प्रकार के एकाधिकार का लगातार विरोध किया है। ऐसे में पारदर्शिता, पंथक सहमति और संस्थागत जवाबदेही के आधार पर कोई भी निर्णय लिया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। उन्होंने बताया कि नौ जून को एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को संबोधित एक विस्तृत पत्र में डॉ. रबिंदर नारायण ने इस परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की है। प्रस्ताव के अनुसार जीटीसी नेटवर्क संपूर्ण प्रसारण ढांचे का खर्च स्वयं वहन करेगा, जिसमें सैटेलाइट ट्रांसमिशन, टेलीविजन वितरण, ओटीटी प्लेटफॉर्म एकीकरण तथा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया सहित प्रमुख सिख प्रवासी क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
प्रो. ख्याला ने कहा कि प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि एसजीपीसी पर किसी प्रकार का वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, जबकि संपादकीय नियंत्रण, सामग्री चयन, प्रसारण नीति और सिख मर्यादा के पालन का पूर्ण अधिकार एसजीपीसी के पास ही रहेगा। यह संपूर्ण कार्य श्री अकाल तख्त साहिब के सिद्धांतों और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के अनुरूप संचालित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सूचना और वैचारिक प्रस्तुति का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। ऐसे समय में सिख समुदाय के पास अपना मजबूत, विश्वसनीय और आधुनिक मीडिया मंच होना आवश्यक है, जो आने वाली पीढ़ियों को गुरमत मूल्यों से जोड़ सके और विश्व समुदाय तक सिख धर्म के 'सरबत दा भला' के संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके।
प्रो ख्याला ने कहा कि इस प्रस्ताव को लेकर सिख संगत में व्यापक उत्सुकता है। इसलिए एसजीपीसी को अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करना चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रसारण विशेषज्ञों, धार्मिक विद्वानों और पंथक प्रतिनिधियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर प्रस्ताव के सभी पहलुओं का अध्ययन करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सिख सिद्धांतों की पवित्रता, पंथक संस्थाओं की मर्यादा और एसजीपीसी की संस्थागत स्वतंत्रता को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखते हुए यह योजना लागू होती है, तो यह विश्वभर की सिख संगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है। उन्होंने एसजीपीसी से इस अवसर पर पंथक दृष्टिकोण से विचार करने, पूर्ण पारदर्शिता के साथ निर्णय लेने और संगत की लंबे समय से चली आ रही भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
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