चंडीगढ़ , जून 19 -- प्रवासी भारतीयों के संगठन इंडस कनाडा फाउंडेशन ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की सार्वजनिक मामलों में भूमिका और उसके संस्थागत ढांचे की व्यापक संवैधानिक एवं कानूनी समीक्षा की मांग की है। फाउंडेशन का कहना है कि भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा आवश्यक है, जो पहचान-आधारित राजनीति को बढ़ावा देती हैं।
चंडीगढ़ में शुक्रवार को जारी एक बयान में फाउंडेशन के अध्यक्ष विक्रम बाजवा ने कहा कि एसजीपीसी के मौजूदा संचालन ढांचे और सार्वजनिक जीवन में उसके प्रभाव का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसकी भूमिका भारत के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि भारत का शासन केवल संविधान, संसद द्वारा बनाये गये कानूनों, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों के अनुसार संचालित होना चाहिए। किसी भी धार्मिक संस्था के निर्देशों के आधार पर समानांतर प्रभाव या शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक गणराज्य की भावना के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।
श्री बाजवा ने कहा कि एसजीपीसी जैसी संस्थाओं का गठन मूल रूप से धार्मिक मामलों और गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए किया गया था। इसलिए ऐसी संस्थाओं को अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर कार्य करना चाहिए और सार्वजनिक नीति या शासन संबंधी मामलों में उनकी भूमिका की संवैधानिक दृष्टि से समीक्षा होनी चाहिए।
फाउंडेशन ने निर्वाचन आयोग की भूमिका का भी उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी राजनीति को विकास, आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित रखना बेहद आवश्यक है। संगठन का मानना है कि यही कारक भारत को वैश्विक मंच पर और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा जी-7 जैसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय समूहों में उसकी दावेदारी को मजबूती प्रदान करेंगे।
बयान में कहा गया कि भारत का भविष्य उन संस्थाओं को सशक्त बनाने में निहित है, जो नागरिकों को धर्म, जाति या संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने के बजाय एकजुट करने का कार्य करें। फाउंडेशन ने नीति निर्माताओं, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक समाज से विकास, योग्यता और राष्ट्रीय हित आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया।
फाउंडेशन के अनुसार इस प्रकार के संस्थागत और कानूनी सुधार न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेंगे, बल्कि भारत की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बढ़ाएंगे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित