अमृतसर , जून 27 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की विशेष आम सभा में सदस्यों ने श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों पर दृढ़ता से अमल करने की प्रतिबद्धता जतायी है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पांच जुलाई को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार एक विशाल पंथक एकत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सिख धार्मिक संस्थाओं, जत्थेबंदियों और संगतों को आमंत्रित किया जाएगा।
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज सहित पांचों तख्तों के प्रतिनिधि, श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी तथा एसजीपीसी के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है और उसके आदेशों का पालन करना प्रत्येक सिख का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा श्री अकाल तख्त के आदेशों को चुनौती देना सिख संस्थाओं के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है। उन्होंने सिख समुदाय से संस्थाओं को कमजोर करने के कथित प्रयासों के खिलाफ एकजुट रहने का आह्वान किया।
एडवोकेट धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त के आदेशों से संगतों को अवगत कराना एसजीपीसी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पांच जुलाई को होने वाले पंथक एकत्र में सभी सिख सम्प्रदायों, धार्मिक संगठनों और संस्थाओं को आमंत्रित किया जाएगा।
बैठक में पारित प्रस्तावों में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के संबंध में जारी आदेश का समर्थन किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री से जुड़े कथित वीडियो ने सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और श्री अकाल तख्त द्वारा इस मामले का संज्ञान लेना उचित कदम है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि गुरु साहिबान, सिख परंपरा और धार्मिक प्रतीकों का सम्मान सर्वोपरि है तथा इनके प्रति किसी भी प्रकार का अपमान करोड़ों सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। एसजीपीसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अब तक इस मामले में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनसे नैतिक आधार पर पद से इस्तीफा देने की मांग भी दोहरायी गयी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि श्री अकाल तख्त के आदेशों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया जाएगा और प्रचारक जत्थे संगतों को इस संबंध में प्रेरित करेंगे।
एसजीपीसी की आम सभा ने एक अन्य प्रस्ताव में महाराष्ट्र सरकार द्वारा तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब से संबंधित 1956 के अधिनियम को बदलने की प्रस्तावित पहल पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रस्ताव में कहा गया कि सिख धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन और स्वायत्तता में किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। एसजीपीसी ने महाराष्ट्र सरकार से 1956 के मूल अधिनियम को यथावत बनाये रखने और किसी भी प्रकार के संशोधन की प्रक्रिया रोकने की अपील की।
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