देहरादून/डोईवाला , अक्टूबर 22 -- उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बल को आईएसओ 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। इसके साथ ही एसडीआरएफ उत्तराखंड देश का पहला ऐसा आपदा प्रतिवादन बल बन गया है, जिसे यह प्रमाणपत्र मिला है। यह उपलब्धि बल की अनुशासित कार्यप्रणाली, मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुपालन, पारदर्शी दस्तावेजीकरण और गुणवत्ता प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में भूकंप, भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटने, बाढ़, हिमस्खलन और सड़क दुर्घटनाओं जैसी आपात परिस्थितियों में एसडीआरएफ की 40 से अधिक टीमें प्रदेशभर में 24 घंटे राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तत्पर रहती हैं। चारधाम यात्रा से लेकर दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों और साहसिक पर्यटन स्थलों तक बल के जवान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आइएसओ प्रमाणन प्रक्रिया के तहत 23 से 25 सितंबर 2026 तक जौलीग्रांट स्थित एसडीआरएफ वाहिनी मुख्यालय में द्वितीय ऑडिट किया गया। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के पूर्व वैज्ञानिक 'जी' एवं उप महानिदेशक विष्णु गुप्ता ने सेनानायक एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी की उपस्थिति में विभिन्न शाखाओं और कार्यप्रणालियों का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, प्रशिक्षण, संसाधन प्रबंधन, दस्तावेजीकरण, गुणवत्ता प्रबंधन और मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुपालन का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद 8 अक्टूबर 2026 को बल को आईएसओ 9001:2015 प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
इस प्रमाणन से एसडीआरएफ की कार्यप्रणाली में मानकीकरण, जवाबदेही और निरंतर सुधार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रशिक्षण व्यवस्था, उपकरणों के रखरखाव, संसाधनों के बेहतर उपयोग और रेस्क्यू अभियानों की तैयारियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। इससे कार्यप्रणाली की कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की प्रक्रिया भी मजबूत होगी।
एसडीआरएफ की टीमें चारधाम यात्रा के दुर्गम पैदल मार्गों, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे ट्रेकर्स के रेस्क्यू, नदियों में खोज एवं बचाव, सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अहम भूमिका निभाती हैं। ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग और धार्मिक आयोजनों के दौरान भी बल त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तत्पर रहता है।
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