भुवनेश्वर , सितंबर 11 -- माकपा के पूर्व महासचिव सीताराम येचुरी की याद में शुक्रवार को यहां आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में शिक्षा और रोजगार के बढ़ते संकट तथा लोकतांत्रिक मूल्यों पर मंडराते खतरों की तीखी आलोचना की गयी।
इस दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने युवाओं और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक संघर्ष का आह्वान किया।
"संकट से जूझता युवा : शिक्षा, रोजगार और लोकतंत्र" विषय पर आयोजित इस सभा में बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया।
मुख्य वक्ता के रूप में सभा को संबोधित करते हुए श्री भट्टाचार्य ने वामपंथी और प्रगतिशील ताकतों पर बढ़ते हमलों, नवउदारवादी पूंजीवाद के गहराते संकट और कई देशों में नव-फांसीवादी ताकतों के उभार की कड़े शब्दों में आलोचना की।
उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों की भी कड़ी आलोचना की, विशेष रूप से शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र और युवाओं के अधिकारों पर उनके दुष्प्रभावों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वामपंथी और प्रगतिशील ताकतों की ज़िम्मेदारी बढ़ गयी है। इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा करने तथा युवाओं एवं छात्रों को उनके अधिकारों के लिए अधिक से अधिक एकजुट करने का आह्वान किया।
श्री भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि समाजवाद एक अधिक न्यायसंगत सामाजिक व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा, "बदलाव समय की मांग है।"कार्यक्रम की अध्यक्षता 'सीताराम येचुरी मेमोरियल सेलिब्रेशन कमेटी' के अध्यक्ष सुरेश पाणिग्राही ने की, जबकि समिति के सचिव प्रदीप्त नायक ने स्वागत भाषण दिया।
सभा में शिक्षा और रोज़गार के बिगड़ते संकट, लोकतंत्र पर मंडराते संभावित खतरों और युवाओं तथा छात्रों के सामने आने वाले अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गयी।
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