धार , फरवरी 8 -- नवजात शिशु जब कमजोर या गंभीर बीमारियों से जूझते हुए जीवन की डोर छोड़ता नजर आता है, तब उसके परिजनों के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आता है सरकारी अस्पताल का एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट) वार्ड। प्रदेश की टॉप-10 एसएनसीयू में शामिल धार जिला अस्पताल की यह यूनिट बीते वर्षों में सैकड़ों नवजातों को नया जीवन देने में सफल रही है।
बीते दो वर्षों में निजी अस्पतालों से साढ़े तीन हजार से अधिक नवजातों को धार जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया, जिनमें से 3200 से अधिक बच्चों को स्वस्थ कर उनके परिवारों को सौंपा जा चुका है। यह यूनिट पिछले 13 वर्षों से लगातार 24 घंटे, सातों दिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम द्वारा संचालित की जा रही है, जहां एक-एक नवजात की सांस और धड़कन को सुरक्षित रखने के लिए सतत प्रयास किए जाते हैं।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 और 2025 में करीब साढ़े पांच हजार नवजात विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण एसएनसीयू में भर्ती हुए। इनमें लगभग साढ़े तीन हजार बच्चे निजी अस्पतालों से रेफर किए गए थे। इनमें अधिकांश नवजात कम वजन के थे, जिनका वजन एक किलो से ढाई किलो के बीच रहा। जन्म के बाद सांस की समस्या, पेट में गंदा पानी जाना, पीलिया, निमोनिया, हाइपोथर्मिया जैसी बीमारियां पाई गईं, जिनका उपचार यूनिट के वार्मर में रखकर किया गया।
अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में निजी अस्पतालों से 1642 नवजात केयर यूनिट में लाए गए, जबकि जिला अस्पताल से 927 बच्चे भर्ती हुए। इस दौरान 2349 बच्चों को स्वस्थ किया गया, वहीं 220 नवजातों को बचाया नहीं जा सका। वर्ष 2025 में कुल 2828 नवजातों का उपचार किया गया, जिनमें 1956 निजी और 872 सरकारी अस्पताल से आए थे। इनमें 2559 बच्चों को नया जीवन मिला, जबकि 269 नवजातों की मृत्यु हुई।
धार जिला अस्पताल का एसएनसीयू प्रदेश की टॉप-10 यूनिट में शामिल है, लेकिन यहां सर्जन और बेबी सर्जरी ओटी की कमी बनी हुई है। सर्जरी की आवश्यकता वाले बच्चों को इंदौर रेफर करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि गंभीर अवस्था में आने और स्वस्थ होकर लौटने वाले नवजातों में बेटियों की संख्या अधिक है, जिससे जेंडर रेशियो बनाए रखने में भी इस यूनिट की अप्रत्यक्ष भूमिका सामने आई है।
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