रांची , जून 21 -- झारखण्ड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल और कुछ पारंपरिक मीडिया द्वारा यह भ्रामक और गलत जानकारी फैलाई जा रही है कि मौजूदा मतदाता सूची से कुछ मतदाताओं के नाम हटा दिए जाएंगे।
श्री कुमार ने कहा कि कुछ राजनीतिक नेता भी भारत के नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों को स्पष्ट किए बिना इस तरह के भ्रामक और दुष्प्रचार वाले बयान दे रहे हैं। आयोग के ये निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि भारत का कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।
श्री कुमार ने कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण करने का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को दिया गया एक संवैधानिक अधिकार है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत एक वैधानिक अधिकार है, इसलिए भारत के किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा।
श्री कुमार ने कहा कि आपमें से अधिकांश लोग विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण से परिचित हैं, जो एक एकल-चरण प्रक्रिया है जिसमें सभी मौजूदा मतदाताओं को प्रारूप सूची में शामिल किया जाता है और मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। एसएसआर प्रक्रिया सामान्यतः एक वार्षिक प्रक्रिया होती है, और कुछ वर्षों में इसे दो बार भी आयोजित किया गया था। बहुत कम वर्षों में, भारत निर्वाचन आयोग के निर्णय के अनुसार, तत्कालीन परिस्थितियों (जैसे कोविड-19) के आधार पर किसी विशेष वर्ष में एसएसआर आयोजित नहीं किया गया था, जैसा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में भारत निर्वाचन आयोग को अधिकार दिया गया है।
वहीं उन्होंने कहा कि आपमें से अधिकांश लोग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से परिचित नहीं हैं, क्योंकि यह झारखण्ड में 23 वर्षों के बाद आयोजित होने जा रहा है। यह एक 'डी-नोवो' (नए सिरे से) प्रक्रिया है, जो कि दो चरणों वाली प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची के सभी मौजूदा मतदाताओं को इन्यूमरेशन फॉर्म प्रदान किया जाता है। वे सभी मतदाता जो इन्यूमरेशन फॉर्म हस्ताक्षर कर जमा करेंगे, उनसे बिना किसी दस्तावेज़ मांगे उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा।
दूसरे चरण में, भारत के नागरिकों से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने के लिए दावे और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाती हैं। संबंधित व्यक्ति के अपात्रता के आधार पर, प्रारूप मतदाता सूची में किसी मतदाता के नाम को बाहर करने के लिए प्रपत्र-7 में आपत्ति भी आमंत्रित की जाती है। हमारे देश में, स्वतंत्रता के बाद से अब तक नौ बार मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण आयोजित किया जा चुका है और वर्तमान में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण 2025-26 हमारे देश का दसवां विशेष गहन पुनरीक्षण है।
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तरह, विशेष गहन पुनरीक्षण भी मतदाताओं और राजनीतिक दलों दोनों के लिए एक पारदर्शी और सहभागी प्रक्रिया है।
इन्यूमरेशन फेज (30 जून 2026 से 29 जुलाई 2026) के दौरान, 2026 की वर्तमान मतदाता सूची के सभी मौजूदा मतदाताओं को इन्यूमरेशन फॉर्म प्रदान किया जाएगा और वे सभी मतदाता जो हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म जमा करेंगे, उन्हें एसआईआर 2026 की प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। दूसरे शब्दों में, जो भी मतदाता हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म जमा करेंगे, चाहे वह किसी भी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की पिछली एसआईआर मतदाता सूची (जिसमें 2003 की झारखण्ड एसआईआर मतदाता सूची भी शामिल है) के साथ मैप किया गया हो या नहीं, उन्हें एसआईआर 2026 के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा और इन्यूमरेशन फेज के दौरान मतदाताओं द्वारा कोई दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
अन कलेक्टवल इन्यूमरेशन फॉर्म की निम्नलिखित पांच श्रेणियों को एसआईआर 2026 के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
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