कानपुर , मार्च 13 -- उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने शुक्रवार को कहा कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 1.04 करोड़ मतदाताओं की मैपिंग नहीं पाई गई, जबकि 2.22 करोड़ मतदाताओं के नामों में तार्किक विसंगतियां सामने आईं।
उन्होने कहा कि इन दोनों श्रेणियों के कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, जिनमें से लगभग 98 प्रतिशत मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। शेष मामलों की सुनवाई 27 मार्च तक जारी रहेगी, जबकि 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों तथा निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होने एसआईआर की प्रगति की समीक्षा की और उनसे फीडबैक प्राप्त किया। बैठक में अभियान के विभिन्न चरणों, दावे-आपत्तियों और सुनवाई प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया एक सतत व्यवस्था है और विधानसभा अथवा लोकसभा चुनाव में नामांकन की अंतिम तिथि तक पात्र नागरिक अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इसके लिए पात्र नागरिक फॉर्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं, जबकि नाम विलोपन और संशोधन के लिए फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की व्यवस्था है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में पोलिंग एरिया स्पष्ट रूप से निर्धारित करें, जिससे कोई क्षेत्र छूटे नहीं और किसी क्षेत्र में ओवरलैपिंग भी न हो। उन्होंने कहा कि इससे बूथ लेवल अधिकारियों को अपने बूथ क्षेत्र के प्रत्येक मतदाता तक पहुंचने में सुविधा होगी और कोई भी पात्र नागरिक इस प्रक्रिया से वंचित नहीं रहेगा।
उन्होंने बुक ए कॉल विद बीएलओ सेवा की भी समीक्षा की। उन्हे बताया गया कि जिले में इस सेवा के तहत 12 मार्च तक 29,535 नागरिकों से बीएलओ द्वारा निर्धारित 48 घंटे की समयावधि में संपर्क स्थापित किया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सभी राजनीतिक दलों के साथ समन्वय स्थापित कर पूर्ण पारदर्शिता के साथ मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाएं, जिससे कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
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