नयी दिल्ली , जनवरी 19 -- तृणमूल कांग्रेस महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए इसे 'ऐतिहासिक निर्देश' करार दिया। उन्होंने कहा कि शीर्ष न्यायालय के हस्तक्षेप ने एक 'क्रूर, राजनीतिक रूप से प्रेरित और गहराई से अन्यायपूर्ण' प्रक्रिया पर निर्णायक प्रहार किया है।
श्री बनर्जी ने अपने व्हाट्सऐप चैनल पर जारी पोस्ट में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रक्रियागत निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, विशेष रूप से उन मतदाताओं के लिए जिन्हें 'तार्किक विसंगति' की श्रेणी में चिह्नित किया गया है।
उन्होंने कहा, "हम चुनाव आयोग को दिए गए उच्चतम न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्देश का पूरे दिल से स्वागत करते हैं। यह अत्यंत आवश्यक हस्तक्षेप क्रूर, राजनीतिक रूप से प्रेरित और गहराई से अन्यायपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया पर निर्णायक प्रहार है।"तृणमूल नेता के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि जिन मतदाताओं के नामों को मनमाने ढंग से 'तार्किक विसंगति' जैसे अस्पष्ट कारणों से चिह्नित किया गया है, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए, जिससे अपारदर्शिता और मनमानी पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि अदालत ने 'अनमैप्ड मतदाताओं' की सूची सार्वजनिक करने, बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए-द्वितीय) को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति देने तथा सुनवाई स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने के भी निर्देश दिए हैं।
श्री बनर्जी ने यह भी कहा कि शीर्ष न्यायालय ने मतदाता सत्यापन के लिए माध्यमिक (कक्षा 10) परीक्षा के प्रवेश-पत्र को वैध पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने की अनुमति दी है तथा प्रक्रिया के दौरान बुलाए गए प्रत्येक मतदाता को लिखित रसीद देने का आदेश दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "उच्चतम न्यायालय ने हर स्तर पर पारदर्शिता का सही आदेश दिया है। भाजपा-चुनाव आयोग गठजोड़ बेनकाब हो गया है।" उन्होंने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी पर बंगाल को निशाना बनाने के लिए चुनावी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा, "यह चुनाव आयोग के चेहरे पर एक न्यायिक तमाचा है," और दावा किया कि "बंगाल की जनता मतदान पेटी के जरिए भाजपा को इससे भी कड़ा लोकतांत्रिक तमाचा देगी।"उच्चतम न्यायालय के ये निर्देश उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आए, जिनमें देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने और प्रक्रियागत अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मतदाताओं को बिना स्पष्ट कारण, पर्याप्त सूचना या पारदर्शिता के चिह्नित या तलब किया जा रहा है, जिससे योग्य मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने की आशंका है।
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