कोलकाता , जनवरी 19 -- तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए सोमवार को दावा किया कि शीर्ष अदालत ने उनकी पार्टी की लंबे समय से चली आ रही मांगों को सही ठहराया है और चुनाव आयोग तथा भाजपा के बीच कथित "समझ" को उजागर किया है।

श्री बनर्जी ने उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, अदालत के निर्देश सार्वजनिक होने के तुरंत बाद कहा कि यह फैसला आम मतदाताओं की जीत है, जिनका मौलिक मताधिकार खतरे में डाला जा रहा था।

उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि "तार्किक विसंगतियों" (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी) के आधार पर चिन्हित किए गए मतदाताओं की सूची प्रकाशित की जाए और उसे प्रत्येक ग्राम पंचायत, ब्लॉक और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता अपने अधिकृत प्रतिनिधियों, परिवार के सदस्यों या बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) के माध्यम से दस्तावेज जमा कर सकते हैं, बशर्ते उनके पास उचित प्राधिकरण हो।

न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए श्री बनर्जी ने कहा कि "भाजपा का एसआईआर खेल खत्म हो गया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो-तीन महीनों में वैध दस्तावेज होने के बावजूद गरीब और बुजुर्ग मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिशें की गईं।

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस लगातार यह मांग करती रही है कि विसंगतियों के नाम पर चिन्हित मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की जाए, लेकिन चुनाव आयोग ने पहले इसे खारिज कर दिया था।

श्री बनर्जी ने याद दिलाया कि 31 दिसंबर को उन्होंने पार्टी प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी और करीब 1.35 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के नोटिस भेजे जाने को लेकर चिंता जताई थी, जबकि उनके दस्तावेज सही थे। उनका कहना है कि उस समय आयोग ने सूची प्रकाशित करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि ऐसा करने से पूरी प्रक्रिया उजागर हो जाती।

बूथ लेवल एजेंट्स की भूमिका पर उच्चतम न्यायालय की स्पष्टता का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि तृणमूल ने पहले भी बीएलए को सुनवाई केंद्रों में उपस्थित रहने की अनुमति मांगी थी, जिसे आयोग ने ठुकरा दिया था। उन्होंने दावा किया कि अदालत का आदेश तृणमूल के रुख की पुष्टि करता है और इसे बंगाल के लोगों की जीत बताया।

श्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को समर्थन न देने वाले मतदाताओं को चुन-चुनकर मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश ने लगभग एक करोड़ मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कथित योजना को विफल कर दिया है। उन्होंने जोर दिया कि तृणमूल कांग्रेस भाजपा को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर पराजित करेगी।

अपने संबोधन में श्री बनर्जी ने भाजपा-शासित राज्यों में बंगाली भाषियों पर कथित हमलों का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि उन्हें बाहरी करार दिया जा रहा है। उन्होंने धार्मिक ध्रुवीकरण की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी निशाने पर लिया।

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए श्री बनर्जी ने उत्तर 24 परगना जिले के लिए आक्रामक लक्ष्य तय करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से सभी 33 सीटें जीतने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल राज्य में 250 से अधिक सीटें जीतेगी, जबकि भाजपा की सीटें 50 से नीचे सिमट जाएंगी।

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