चेन्नई , नवंबर 01 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ एकजुट विपक्ष के साथ समन्वय और आगे की कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करेन के लिए रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

श्री स्टालिन ने मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए सभी राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को भुलाकर "नागरिकों के अधिकारों को छीनने" के उद्देश्य से की जा रही इस साजिश का विरोध करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा विशेष रूप से नवंबर और दिसंबर के मानसून के महीनों के दौरान एसआईआर का जल्दबाजी और अस्पष्ट संचालन व्यावहारिक कठिनाइयाँ पैदा करेगा और मताधिकार से वंचित होने का जोखिम पैदा करेगा, जिसकी तुलना बिहार में किए गए विवादास्पद मतदाता सूची संशोधनों से की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी जोर दिया कि एसआईआर प्रक्रिया महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जातियों जैसे कमज़ोर समूहों को लक्षित करती है, जो बिहार में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने की घटना की याद दिलाती है, जहाँ कथित तौर पर पारदर्शिता का अभाव था।

इस सर्वदलीय बैठक का निमंत्रण न केवल द्रमुक के गठबंधन सहयोगियों को दिया गया था, बल्कि पीएमके, विजय की टीवीके और अभिनेता सीमन की एनटीके जैसी पार्टियों सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को भी दिया गया था।

विपक्षी अन्नाद्रमुक ने पारदर्शी और व्यवस्थित संशोधन के एजेंडे का स्वागत किया है, लेकिन एसआईआर के कार्यान्वयन के समय और तरीके की आलोचना की है। भाजपा ने भी एसआईआर को एक नियमित प्रक्रिया बताते हुए इसका बचाव किया है और श्री स्टालिन के विरोध पर सवाल उठाए हैं।

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