देहरादून , अक्तूबर 05 -- देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर) 2026 एक अनावश्यक, मतदाताओं (वोटरों) को परेशान करने वाली, पात्र वोटर के नाम काटने की साजिश और निर्वाचक नियमावली विरूद्ध प्रक्रिया सिद्ध हुई है। यह आरोप सोमवार कोउत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष और एसआईआर समिति अध्यक्ष, पूर्व विधायक मनोज रावत ने संवाददाता सम्मेलन में लगाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में एक नशेड़ी बेटे की तरह चुनाव आयोग ने एसआईआर में विभिन्न प्रकार के "वोट चोरों के गिरोहों" के लिए वोट चोरी के दरवाजे खोले थे या वोट काटने के षड़यंत्र में सम्मलित था। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कांग्रेस ने ही अकेले हर स्तर पर वोट चोरी का विरोध किया है। जहां पर कांग्रेस को समय रहत और नियमों में अवसर मिला है, कांग्रेस के कार्यकर्ता वहां पात्र मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में बचाने में सफल रहे हैं।
श्री रावत ने कहा कि कांग्रेस ने राज्य में दावे और आपत्तियों के समय 26, 27 जुलाई से कुछ विधानसभाओं में असामान्य रूप से फॉर्म 7 द्वारा पात्र मतदाताओं के नाम काटने की साजिश को पकड़ा जो संख्या 13 अगस्त तक हजारों तक पहुंच गई थी। उन्होंने कहा कि एक आपत्तिकर्ता ने अकेले 6500 तक आपत्ति दी। सैकड़ों की संख्या में फार्म 7 भरने वाले तो राज्य में दर्जनों आपत्तिकर्ता थे। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के सजग 70 बीएलए-1 और 11600 बीएलए-2 ने राज्य की 30 विधानसभाओं में गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े और कम पड़े लिखे लोगों के फार्म-7 भर कर वोट काटने का बड़ा षडयंत्र उत्तराखंड में खोला। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की सजगता और हर को मतदाता सूची कानूनों की इतनी जानकारी थी कि फार्म-7 भरकर मतदाता के नाम कटवाने वाला एक भी आपत्तिकर्ता सुनवाई में सामने नहीं आया।
पूर्व विधायक मनोज रावत ने दावा किया कि ''वोट डकैती'' के काम में लगे ये सभी झूठे आपत्तिकर्ता सत्ता दल भाजपा के कार्यकर्ता या बीएलए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सूचना है कि प्री प्रिंटेड ये सारी आपत्तियां उत्तराखण्ड में एक विभाग मे निदेशक स्तर पर पदास्थापित अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी और एक विभाग के दर्जधारी के नेतृत्व में तैयार कर हर विधानसभा तक भेजी गई हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम आंकड़ों के अनुसार 96704 आपत्तिकर्ताओं ने वोट काटने के फॉर्म 7 का प्रयोग किया । कांग्रेस के हर स्तर पर लिखित विरोध और कानूनी अभियान चलाने के बाद इनमें से केवल 7523 मतदाताओं के नाम ही कट पाए। इनमें अधिकांश वे फॉर्म 7 थे, जो मतदाता ने या उसके संबंधी ने अपना नाम उस भाग (बूथ) से काटने के लिए भरे थे। इनकी भी कांग्रेस जांच कर रही है।
श्री रावत ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में ड्राफ्ट सूची तक पंहुचे 24 लाख 30 हजार 387 वोटर्स को चुनाव आयोग ने दिल्ली से अपने सिस्टम के द्वारा तार्किक विसंगतियों के और नोट मैप्ड के नोटिस दिए। उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के हवाले से बताया कि इनमें से 97 हजार 186 वोटर ने इन नोटिसों का जवाब नहीं दिया। इन सभी को आयोग ने ''इनेलिजिबल मतदाता'' बताकर इनके विरुद्ध भी ईआरओ/एईआरओ को आपत्तिकर्ता दिखाकर सिस्टम ने फॉर्म 7 स्वत ही सृजित कर दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस तरीके से 97186 वोटर के नाम अंतिम दिन मतदाता सूची से हटा दिए हैं। इनमें से किसी को सुनवाई का मौका भी नहीं मिला है।
अध्यक्ष , एसआईआर समिति श्री रावत ने कहा कि 28 सितंबर को सुनवाई के लगभग अंतिम दिन हरिद्वार ग्रामीण सहित कुछ विधानसभाओं में स्वत सृजित फॉर्म 7 द्वारा पात्र वोटर्स के नाम काटने की साजिश भी पकड़ी गई। उन्होंने दावा किया कि हरिद्वार ग्रामीण के लगभग 4000 से अधिक वोटरों के नाम 28 सितंबर के बाद काटे हैं। ऐसा राज्य की कई विधानसभाओं में किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी जल्दी ही इस मामले में उच्च या उच्चतम न्यायालय की शरण में जाएगी।
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