नयी दिल्ली , अप्रैल 07 -- एल्युमिनियम एक्सट्रुज़न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एलेमाई) ने मंगलवार को 'एल्युमिनियम भारत' पहल की घोषणा की और सरकार से निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए सस्ती ऊर्जा एवं कर्ज तथा करो में रियायत की मांग की।

उद्योग इसी वर्ष सितंबर में अहमदाबाद में एक बड़ी प्रदर्शनी और सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है।

इस पहल का उद्घाटन वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने यहां संगठन के एक कार्यक्रम में किया। इस मौके पर श्री प्रसाद ने वैश्विक व्यापार में आ रहे परिवर्तनों के बीच स्थानीय उत्पाद क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, "'एल्युमिनियम भारत' पहल यह दिखाती है कि भारत एल्युमिनियम निर्माण में वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ना चाहता है। सरकार भारतीय उद्योग को समान अवसर देने और भारत को उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य भारत के एल्युमिनियम सेक्टर को मजबूत बनाते हुए हाल की परिस्थिति में देश-विदेश से सामने आ रही चुनौतियों का सामना करना है।

संगठन की विज्ञप्ति के अनुसार 'एल्युमिनियम भारत' के तहत नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और वैश्विक हितधारकों को एक मंच पर लाया जाएगा, ताकि उद्योग से जुड़ी प्रमुख समस्याओं पर मंथन कर भविष्य में एल्युमिनियम सेक्टर के सतत विकास के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार किया जा सके।

इस पहल के तहत 'एल्युमिनियम भारत-2026' के नाम से संपूर्ण एल्युमिनियम वेल्यू चेन को दर्शाने वाली देश की पहली एवं सबसे बड़ी एल्युमिनियम प्रदर्शनी 26 से 29 सितंबर तक गुजरात के गांधीनगर में हेलिपेड एक्झिबिशन सेन्टर में आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी एल्युमेक्स इन्डिया-2026 के साथ होगी। इससे भारत के प्राथमिक तथा डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम उत्पादों को स्थापित वैश्विक मंचों जैसे एल्युमिनियम चाईना, एल्युमिनियम यूएसए और एल्युमिनियम डसेलडॉर्फ के समकक्ष लाने का प्रयास किया जाएगा।

गांधीनगर में होने वाला यह आयोजन भारत के एल्युमिनियम उद्योग की क्षमता के आत्म विश्वास को प्रदर्शित करते हुए एलेएमाई के 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को मजबूती देगा, जिससे आयात पर निर्भरता कमी होगी।

एलेमाई, अहमदाबाद के अध्यक्ष जितेंद्र चोपड़ा ने उद्योग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम सेक्टर गंभीर संकट से गुजर रहा है। उत्पादन में 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। देश की कुल क्षमता 42 लाख टन होने के बावजूद इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक्सट्रूज़न यूनिट्स 12-13 लाख टन और रोल्ड प्रोडक्ट्स करीब 15 लाख टन पर काम कर रहे हैं, जो क्षमता से काफी कम है। यह स्थिति स्थानीय समस्याओं तथा वैश्विक संकट के परिणामस्वरूप आई है।

उन्होंने कहा कि आज उद्योग के सामने सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल और ऊर्जा की बढ़ती हुई लागत है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिससे एल्युमिनियम जैसे ऊर्जा-आधारित उद्योग पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके अलावा उत्पादकों के लिए परिवहन लागत और सप्लाई चेन की समस्याएं भी बढ़ गई हैं।

दूसरी ओर भारत में खास कर एल्युमिनियम स्क्रैप की कमी है जिसके कारण कच्चे माल की लागत दुनिया में सबसे अधिक है, जो डाउनस्ट्रीम उद्योग के लिए अत्यंत जरूरी है। इन चुनौतियों के साथ-साथ टेरिफ असंतुलन तथा ट्रेड डिस्टोर्शन भी समस्या को बढ़ा रहे हैं । एक तरफ भारतीय उत्पादक विकासशील देशों में सबसे अधिक इनपुट लागत से जूझ रहे हैं वहीं सस्ते आयातित एल्युमिनियम उत्पाद भारतीय बाजार में तेजी से आ रहे हैं। यह उन देशों से आ रहें है जहां सब्सिडी, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और अतिरिक्त उत्पादन का लाभ मिलता है, जिससे भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर हो रही है।

वहीं ऑपरेशनल चुनौतियां जैसे कि रेग्यूलेटरी जटिलताएं, ईंधन की अनियमित उपलब्धता और श्रम से जुड़ी समस्याएं भी उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, खासकर छोटे और मझौले सेक्टर के लिए जो डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम की रीढ है।

एल्युमिनियम वैल्यू चेन भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है और यह 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती है। डाउनस्ट्रीम सेक्टर को मजबूत करना अत्यंत जरूरी है, ताकि वैल्यू एडिशन बढ़े, मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिस्पर्धा मजबूत हो और सरकार के 5 लाख करोड डॉलर डॉलर अर्थव्यवस्था तथा 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

सस्टेनेबिलिटी के नजरिए से भी एल्युमिनियम सेक्टर बहुत अहम है। इसे बार-बार रिसायकल किया जा सकता है और इसमें कम ऊर्जा की जरूरत होती है। यही कारण है कि यह डीकार्बोनाइजेशन और नेट-ज़ीरो जैसे पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाता है ।

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