नयी दिल्ली , जुलाई 18 -- राजधानी में इस सप्ताह आयोजित कला प्रदर्शनी 'आकाश में नदियां हैं' में जल, स्मृतियों, पर्यावरण और मानव जीवन के गहरे संबंधों की कैनवास, कांच और रंगों के माध्यम से सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली।

तुर्की की विश्वप्रसिद्ध लेखिका एलिफ शफाक के उपन्यास - देयर आर रीवर्स इन दी स्काई - से प्रेरित इस प्रदर्शनी ने त्रिवेणी कला संगम की श्रीधराणी आर्ट गैलरी में 12 जुलाई से 17 जुलाई तक बड़ी संख्या में कला प्रेमियों काे आकर्षित किया। इसमें कलाकार सरुहा किलारू ने कांच की मूर्तियों, प्रिंटमेकिंग, मोनोप्रिंट तथा मिश्रित माध्यम की कलाकृतियों के माध्यम से जल को परिवर्तन, इतिहास और प्रकृति के परस्पर संबंध के एक प्रतीक के रूप में अद्भुत रूप से प्रस्तुत किया ।

प्रियांशी एस द्वारा क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी में अरावली क्षेत्र के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र, विलुप्तप्राय वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं के संरक्षण जैसे विषयों को भी कला के माध्यम से प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया । कई कुशल कलाकारों के साथ मिलकर तैयार की गई कलाकृतियां लोगों में प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता की एक गहरी प्रेरणा देती दिखीं।

प्रदर्शनी का अवलोकन करने आये प्रमुख लोगों में स्प्रिंगडेल्स स्कूल धौला कुआं की प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं पद्मश्री से सम्मानित शिक्षाविद् डॉ. ए. शंकरा रेड्डी शामिल थे। इस्कॉन के राष्ट्रीय संचार निदेशक एवं इस्कॉन नयी दिल्ली के उपाध्यक्ष व्रजेन्द्र नंदन दास ने भी युवा कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने सुश्री किलारु की एकल कला प्रदर्शनी का पूर्वावलोकन किया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।

सुश्री किलारू भाजपा की आंध्र प्रदेश इकाई के मीडिया समन्वयक किलारू दिलीप की पुत्री हैं। श्री दिलीप ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सरुहा किलारू (28) ने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट से प्रिंट विषय में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने भारत और विदेशों में अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन किया है तथा वह नयी दिल्ली स्थित काल्ही स्टूडियोज़ की सह-संस्थापक भी हैं।

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