फगवाड़ा , सितंबर 28 -- लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हालिया घटनाक्रम के बाद सोमवार को स्थिति नियंत्रण में रही।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने विश्वविद्यालय का दौरा कर जांच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है।
श्री यादव ने कहा कि घटनाक्रम से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच के साथ तोड़फोड़ की घटनाओं की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि छात्रों की विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी शिकायतों पर भी चर्चा की गई। छात्राओं के छात्रावासों में महिला कर्मचारियों की उपलब्धता और अन्य मुद्दों के समाधान के लिए पुलिस प्रशासन ने छात्रों और विश्वविद्यालय के बीच समन्वय की भूमिका निभाई।
इस बीच, पुलिस उप महानिरीक्षक जालंधर रेंज नवीन सिंगला, कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव तूरा और उपायुक्त आकाश बंसल समेत वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में विश्वविद्यालय परिसर में फ्लैग मार्च किया गया। अधिकारियों ने बताया कि परिसर में कानून-व्यवस्था सामान्य है और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
छात्र प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस एवं नागरिक प्रशासन के अधिकारियों की बैठक में छात्रों ने छात्रावासों में केवल महिला कर्मचारियों के प्रवेश तथा छात्राओं के छात्रावासों में महिला रसोई कर्मचारियों की मांग उठाई। कुलपति रश्मि मित्तल ने महिला कर्मचारियों की व्यवस्था के प्रयास का आश्वासन दिया, हालांकि इसमें समय लगने की बात कही।
छात्रों ने पूर्व में छात्रों की मौत से जुड़े मामलों, छात्र संघ के गठन और शुल्क में वृद्धि का मुद्दा भी उठाया। विश्वविद्यालय ने इन मामलों पर विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक में छात्रों और प्रशासन के प्रतिनिधियों वाली छात्र समन्वय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक के दौरान, छात्रों ने कई चिंताएं उठायीं, जिनमें यह मांग भी शामिल थी कि केवल महिला कर्मचारियों को ही बालिका छात्रावासों में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए और बालिका छात्रावासों में भोजन परोसने वाले मेस स्टाफ में भी महिलाएं ही शामिल हों। एलपीयू की कुलपति रश्मी मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय महिला कर्मचारियों की व्यवस्था करने के प्रयास करेगा, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।
छात्रों ने छात्रों की मौत से जुड़ी पिछली घटनाओं पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने प्रशासन के समक्ष अपनी चिंताओं को औपचारिक रूप से उठाने के लिए एक छात्र संघ के गठन की भी मांग की।
श्री मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने इस तरह की घटनाओं को कभी नजरअंदाज नहीं किया और इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए एहतियात बरती गई थी कि ऐसे मामलों को उचित तरीके से निपटाया जाये और जहां भी आवश्यक हो, पुलिस कार्यवाही की जाये।
बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि छात्रों के बीच संचार को सुगम बनाने और छात्रों से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए छात्र समुदाय और एलपीयू प्रशासन के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक छात्र समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। छात्रों ने शुल्क संरचना में वृद्धि पर भी चिंता व्यक्त की। कुलपति ने उन्हें आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय इस मामले की जांच करेगा।
अशांति के दौरान हुई तोड़फोड़ के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मित्तल ने कहा कि तोड़फोड़ में शामिल पाये जाने वाले छात्रों को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ उचित पुलिस कार्यवाही शुरू की जाएगी।
पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारी परिसर में हो रही गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे थे। छात्र अपने घरों की ओर लौट रहे थे, जबकि किसी भी प्रकार की और गड़बड़ी को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बरकरार रखी गयी थी। तोड़फोड़ के मामले में भी कार्रवाई पर चर्चा हुई। पुलिस के अनुसार, वाहनों को जलाने के आरोप में थाना सदर फगवाड़ा में 28 सितंबर को प्राथमिकी संख्या 106 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गयी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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