दरभंगा , जुलाई 30 -- बिहार के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा (एलएनएमयू) और डॉ. बिन्देश्वर पाठक रिसर्च फाउंडेशन, नयी दिल्ली के बीच स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन, सामुदायिक विकास, नीति-आधारित अनुसंधान, कौशल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) गवर्नेंस तथा सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह समझौता केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज के प्रति विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र के चारों जिलों के लिए एक वर्ष की कार्ययोजना तैयार कर स्वच्छता, शिक्षा, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक नवाचार और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यक्रम संचालित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पद्म विभूषण डॉ. बिन्देश्वर पाठक के विचारों को समाज तक पहुंचाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डॉ. बिन्देश्वर पाठक रिसर्च फाउंडेशन के उप निदेशक तथा सुलभ इंटरनेशनल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. सुतीर्थ साहारिया ने कहा कि स्वच्छता केवल आधारभूत संरचना का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान, समानता और मानवीय गरिमा से जुड़ा आंदोलन है। उन्होंने राष्ट्रीय सीवर प्रणाली की अवधारणा, स्वच्छता से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने तथा सामुदायिक सशक्तिकरण में स्वच्छता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि इकरारनामा के तहत विश्वविद्यालय में गुणात्मक अनुसंधान (क्वालिटेटिव रिसर्च) पर विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें शिक्षकों और शोधार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को शोध छात्रवृत्ति प्रदान करने की भी योजना है। साथ ही एआई गवर्नेंस, सार्वजनिक नीति, सामाजिक नवाचार और सतत विकास जैसे उभरते विषयों पर संयुक्त शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
सुलभ इंटरनेशनल के सलाहकार एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जी.पी. उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक परिवर्तन का नेतृत्व भी करना चाहिए। डॉ. बॉबी लूथरा और संजय सुमन ने भी विश्वविद्यालय के साथ दीर्घकालिक सहयोग की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. दिव्या हांसदा, आईक्यूएसी निदेशक डॉ. मो. ज़्या हैदर, एमओयू नोडल पदाधिकारी डॉ. मनु राज शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, पदाधिकारी एवं शोधार्थी उपस्थित थे।
फाउंडेशन के अनुसार, यह समझौता मिथिला क्षेत्र में समाजोपयोगी अनुसंधान, जन-जागरूकता, क्षमता विकास तथा सामुदायिक विकास की दिशा में संयुक्त प्रयासों को नई गति देगा।
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