रायबरेली , मार्च 5 -- विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली के ईएनटी विभाग की ओर से एक विशेष सतत चिकित्सकीय शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य श्रवण हानि के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी साझा करना था।
ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. अनन्या सोनी ने बताया कि श्रवण संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान और उपचार से मरीजों, विशेषकर बच्चों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। कार्यक्रम में एसजीपीजीआई, लखनऊ के वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. रविशंकर ने मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में व्याख्यान दिया। उन्होंने "बच्चों में श्रवण हानि एवं कॉक्लियर इम्प्लांट की भूमिका" विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि श्रवण हानि की शीघ्र पहचान और समय पर कॉक्लियर इम्प्लांट के माध्यम से बच्चों को सामान्य जीवन की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के चिकित्सकों, रेजिडेंट्स और स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनन्या सोनी ने नवजात शिशुओं और बच्चों की नियमित श्रवण जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समय पर हस्तक्षेप से बेहतर उपचार परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
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