रायबरेली , सितंबर 26 -- उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान 'एम्स' के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने 70 वर्षीय महिला मरीज के दाहिने पैर की पूरी तरह बंद मुख्य रक्त वाहिका का बिना चीरा लगाए एंजियोप्लास्टी के माध्यम से सफल उपचार किया है।
अस्पताल सूत्रों ने शनिवार को बताया कि मरीज चन्द्रकुमारी दाहिने पैर की उंगली में असहनीय दर्द और सड़न की शिकायत के साथ एम्स पहुंची थीं। जांच में उनके दाहिने पैर की मुख्य रक्त वाहिका पूरी तरह अवरुद्ध पाई गई। सीटीवीएस विभाग में डॉ. संकल्प और उनकी टीम ने एंजियोप्लास्टी के माध्यम से बंद रक्त वाहिका को खोलने में सफलता प्राप्त की। इसके साथ ही पैर की सड़ी हुई उंगली को भी निकाल दिया गया। उपचार के बाद मरीज को दर्द में काफी राहत मिली और उनकी स्थिति में संतोषजनक सुधार हुआ।
एम्स रायबरेली में सीटीवीएस विभाग द्वारा रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियों का उपचार पारंपरिक चीरे वाली शल्य चिकित्सा के साथ आधुनिक बिना चीरे वाली तकनीकों से भी किया जा रहा है। विभाग में वैरिकोज वेन की सर्जरी, ओपन हार्ट सर्जरी, बाईपास सर्जरी, फेफड़ों की सर्जरी, डायलिसिस के लिए फिस्टुला और परमकैथ निर्माण के साथ विभिन्न प्रकार की आपातकालीन सर्जरी भी की जा रही हैं।
एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने इस उपलब्धि पर सीटीवीएस विभाग की टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को लगातार मजबूत करने का उद्देश्य मरीजों को उनके निकट ही गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराना है।
अस्पताल के अनुसार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र मरीजों को एम्स रायबरेली में अनेक उपचार और शल्य चिकित्सा सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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