रायबरेली , अक्टूबर 19 -- रायबरेली के मुंशीगंज स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की आधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण और चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के उद्देश्य से राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

'रायबरेली मिनिमली इनवेसिव न्यूरोसर्जरी कोर्स' (एआरएमआईएनसी) के तहत न्यूरोसर्जरी विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से 100 से अधिक न्यूरोसर्जन शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन न्यूरोलॉजिकल सर्जन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसएसआई) के तत्वावधान में किया गया।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की उन्नत तकनीकों, सर्जिकल एनाटॉमी और इस प्रक्रिया के दौरान आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों के व्याख्यान, सर्जरी के वीडियो प्रदर्शन, संवादात्मक चर्चाएं और मृत शरीर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण (कैडेवरिक हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग) शामिल रहे। इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों को समझने और अपने व्यावहारिक कौशल को विकसित करने का अवसर मिला।

कार्यशाला में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. राज कुमार और प्रो. कुलवंत सिंह तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रो. दीपक सिंह, प्रो. प्रकाश नायर और प्रो. शाह वलीउल्लाह समेत कई प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन शामिल हुए। इसके अलावा गुरुग्राम, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, दिल्ली और तिरुवनंतपुरम सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक प्रो. अमिता जैन ने कार्यशाला के सफल आयोजन पर टीम को बधाई दी। उन्होंने आयोजन में न्यूरोसर्जरी, एनाटॉमी और फिजियोलॉजी विभागों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सर्जिकल दक्षता बढ़ाने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए विभागों के बीच समन्वय, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सतत चिकित्सा शिक्षा महत्वपूर्ण हैं।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. सुयश सिंह ने बताया कि एम्स रायबरेली मिनिमली इनवेसिव न्यूरोसर्जरी कोर्स का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम न्यूरोसर्जन को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने और उनके कौशल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी रीढ़ से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के उपचार की आधुनिक तकनीक है। इसमें छोटे चीरे के माध्यम से सर्जरी की जाती है, जिससे आसपास के ऊतकों को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचता है। उपयुक्त मरीजों में इस तकनीक से सर्जरी के बाद दर्द कम होने, अस्पताल में कम समय तक रुकने और सामान्य गतिविधियों में जल्दी लौटने जैसे लाभ मिल सकते हैं।

चिकित्सा क्षेत्र में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए विशेषज्ञों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव आवश्यक हैं। एम्स रायबरेली में आयोजित यह कार्यशाला आधुनिक न्यूरोसर्जिकल तकनीकों को प्रोत्साहित करने तथा चिकित्सा विशेषज्ञों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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