रायपुर , मार्च 11 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में 10 और 11 मार्च 2026 को आयोजित दो दिवसीय स्नातकोत्तर अनुसंधान अभिविन्यास कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन बुधवार को हुआ।
संस्थान के रिसर्च सेल द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य नैदानिक अभ्यास और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच की दूरी को कम करना तथा पीजी छात्रों को आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान की जटिलताओं से परिचित कराना था।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में चिकित्सा शिक्षा में अनुसंधान की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। रिसर्च की एसोसिएट डीन डॉ. एकता खंडेलवाल और रिसर्च की डीन डॉ. अभिरुचि गल्होत्रा ने व्यवस्थित कार्यप्रणाली और साक्ष्य-आधारित अनुसंधान के महत्व को रेखांकित किया। वहीं अकादमिक डीन डॉ. एली महापात्रा ने कहा कि शोध प्रबंध (थीसिस) केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्रशिक्षण का अहम हिस्सा है और परीक्षा पात्रता के लिए समय पर शोध प्रस्तुत करना आवश्यक है।
कार्यशाला को संस्थान के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) का भी मार्गदर्शन मिला। उन्होंने प्रतिभागियों को कक्षा से आगे बढ़कर ऐसे नैतिक और नवाचार आधारित अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया, जो वास्तविक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में सहायक हों और राष्ट्रीय स्तर पर मरीजों के उपचार परिणामों को बेहतर बना सकें।
दो दिनों तक चले सत्रों में विशेषज्ञ संकाय सदस्यों ने अनुसंधान प्रक्रिया की तकनीकी बारीकियों पर विस्तार से जानकारी दी। इसमें साहित्य खोज रणनीतियां, मजबूत शोध परिकल्पना तैयार करना, सटीक डेटा संग्रह उपकरण विकसित करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग, साहित्यिक चोरी से बचाव और संदर्भ प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे।
मेडिकल रेजिडेंसी के दबाव को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला में तनाव प्रबंधन पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इस पहल से छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रोटोकॉल तैयार करने के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान में दीर्घकालिक करियर के लिए आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ।
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