पटना , मार्च 16 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के चिकित्सकों ने तीन साल की बच्ची के सीने में पाए गए दुर्लभ ट्यूमर गैंग्लियोन्यूरोमा को अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव 'की-होल' थोराकोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से सफलतापूर्वक निकाल दिया।
इस सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पूरे ट्यूमर को सिर्फ पांच मिमी के तीन छोटे-छोटे चीरे लगाकर ही निकाल लिया गया और सीने में बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। ट्यूमर का आकार लगभग 7 x 6 x 5 सेमी था जो सीने के बाएँ हिस्से (लेफ्ट हेमीथोरैक्स) के लगभग आधे हिस्से तक फैला हुआ था।
यह एम्स पटना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह दर्शाता है कि संस्थान अब बच्चों के लिए कम दर्द, कम जोखिम और जल्दी स्वस्थ होने वाली आधुनिक सर्जरी उपलब्ध करा रहा है।गैंग्लियोन्यूरोमा नसों के ऊतकों से बनने वाला एक दुर्लभ और सामान्यतः सौम्य (बेनाइन) ट्यूमर है, जो कभी-कभी सीने में विकसित हो सकता है।
आमतौर पर ऐसे ट्यूमर को निकालने के लिए ओपन थोराकोटॉमी जैसी बड़ी सर्जरी करनी पड़ती है, जिसमें सीने में बड़ा चीरा लगाया जाता है और पसलियों को फैलाना पड़ता है। इससे मरीज को अधिक दर्द होता है, बड़ा निशान रह जाता है और ठीक होने में भी ज्यादा समय लगता है।इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एम्स पटना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम ने इस मामले में आधुनिक मिनिमली इनवेसिव थोराकोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया। छोटे-छोटे चीरे के माध्यम से कैमरा और विशेष उपकरणों की मदद से करीब पांच घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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