पटना , अक्टूबर 30 -- िश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)पटना के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से गुरुवार को 'स्पार्क 2026' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जागरूकता अभियान के साथ बहुविषयक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। 'फर्स्ट कॉल से रिकवरी तक: स्ट्रोक प्रबंधन की बहुविषयक कार्यप्रणाली' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में स्ट्रोक की शीघ्र पहचान, आधुनिक उपचार, पुनर्वास और मरीजों की समग्र देखभाल पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में आईजीआईएमएस, पटना के पूर्व निदेशक प्रो. (डॉ.) ए. के. सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह तथा डीन (स्टूडेंट अफेयर्स) प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा भी मौजूद रहीं।
कार्यक्रम का आयोजन न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार राय के नेतृत्व में किया गया।
अपने संबोधन में प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने एम्स पटना में स्ट्रोक मरीजों की देखभाल के लिए कम से कम 10 बेड की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने 'टाइम इज ब्रेन' की अवधारणा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्ट्रोक के उपचार में प्रत्येक मिनट कीमती होता है। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मस्तिष्क को होने वाली क्षति और स्थायी विकलांगता के खतरे को कम किया जा सकता है।
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