पटना , अगस्त 01 -- िकित्सा शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना ने शनिवार को फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी संग्रहालय तथा मूट कोर्ट का उद्घाटन किया। यह नई सुविधा फोरेंसिक मेडिसिन की शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को नई दिशा देगी।

आज के समय में सड़क दुर्घटनाओं, विषाक्तता, हिंसा, लैंगिक अपराधों तथा अन्य मेडिको-लीगल मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत में हर वर्ष लाखों मेडिको-लीगल मामलों और हजारों पोस्टमार्टम जांचों का निष्पादन किया जाता है जिनमें प्रशिक्षित फोरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में आधुनिक फोरेंसिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा विकसित इस संग्रहालय में संरक्षित मानव अंगों के नमूने, कंकाल, विष विज्ञान (टॉक्सिकोलॉजी) से जुड़े नमूने, मेडिको-लीगल मॉडल, फोरेंसिक उपकरण तथा अन्य शैक्षणिक सामग्री प्रदर्शित की गई है। इससे एमबीबीएस एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को विषय को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद मिलेगी।

संग्रहालय का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह सहित संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य, चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि यह संग्रहालय केवल प्रदर्शनी का स्थान नहीं बल्कि विद्यार्थियों के लिए सीखने का एक जीवंत माध्यम है। इससे भविष्य के चिकित्सकों को फोरेंसिक मेडिसिन, मेडिको-लीगल मामलों और वैज्ञानिक जांच की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी।

प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि यह सुविधा चिकित्सा शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराएगी।

प्रो. (डॉ.) अमित पाटिल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ वास्तविक मेडिको-लीगल परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

संग्रहालय के साथ एक अत्याधुनिक मूट कोर्ट भी स्थापित किया गया है जहाँ न्यायालय जैसी वास्तविक व्यवस्था तैयार की गई है। यहाँ मेडिकल छात्र और रेजिडेंट डॉक्टर विशेषज्ञ गवाह के रूप में साक्ष्य प्रस्तुत करने, मेडिको-लीगल मामलों की सुनवाई तथा न्यायिक प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझ सकेंगे।

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