, May 11 -- पटना,11 मई अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना के कार्डियोलॉजी विभाग में अब अत्याधुनिक हाई-डेफिनिशन इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवीयूएस) तकनीक के माध्यम से हृदय रोगियों का अधिक सटीक और सुरक्षित उपचार संभव हो सकेगा।
संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने शनिवार को नई आईवीयूएसप्रणाली का औपचारिक उद्घाटन किया। इस तकनीक की स्थापना को एम्स पटना में प्रिसीजन बेस्ड कार्डियक केयर की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार आईवीयूएस एक उन्नत इंट्राकोरोनरी इमेजिंग तकनीक है जो हृदय की धमनियों के भीतर से रियल टाइम और हाई रेजोल्यूशन इमेज उपलब्ध कराती है। सामान्य एंजियोग्राफी में जहां केवल रक्त प्रवाह और ब्लॉकेज का बाहरी आकलन संभव होता है वहीं आईवीयूएस धमनियों की आंतरिक संरचना, ब्लॉकेज की गंभीरता, प्लाक की प्रकृति, कैल्शियम की मात्रा तथा रक्त वाहिका के वास्तविक आकार की विस्तृत जानकारी देता है। इससे चिकित्सकों को एंजियोप्लास्टी के दौरान सही आकार का स्टेंट चुनने और उसे अधिक सटीक तरीके से प्रत्यारोपित करने में सहायता मिलती है।
कार्डियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) अनुपम भंभानी ने बताया कि आईवीयूएसगाइडेड पीसीआई तकनीक विशेष रूप से जटिल कोरोनरी आर्टरी डिजीज, लेफ्ट मेन डिजीज, मल्टी वेसल ब्लॉकेज, लंबे एवं कैल्सीफाइड ब्लॉकेज तथा बार बार स्टेंट ब्लॉकेज जैसी जटिल स्थितियों में अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। इस तकनीक के उपयोग से प्रक्रिया की गुणवत्ता बेहतर होती है, स्टेंट फेलियर और पुनः ब्लॉकेज की संभावना कम होती है तथा मरीजों के दीर्घकालिक उपचार परिणामों में सुधार देखने को मिलता है।
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