पटना , अगस्त 06 -- िहार में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, वैज्ञानिक और मरीज केंद्रित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना और स्टेट हेल्थ सोसाइटी (एसएचएस), बिहार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए एक समान मानक विकसित करना है ताकि किसी भी जिले में पहुंचने वाले मरीज को त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत उपचार मिल सके।
यह समझौता बिहार की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का आधार बनेगा। इसके तहत सड़क दुर्घटना, हृदयाघात, स्ट्रोक, विषाक्तता, सर्पदंश, जलने की घटनाओं, प्रसूति आपातकाल तथा अन्य गंभीर परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल बदलने पर उपचार की गुणवत्ता में अंतर का सामना नहीं करना पड़ेगा। पूरे राज्य में एक समान क्लिनिकल प्रोटोकॉल, आधुनिक ट्रायेज प्रणाली और साक्ष्य आधारित उपचार दिशानिर्देश लागू किए जाएंगे जिससे मरीजों को "गोल्डन ऑवर" के भीतर बेहतर और जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
समझौते पर स्टेट हेल्थ सोसाइटी, बिहार की ओर से संयुक्त सचिव सह प्रभारी (प्रशिक्षण) बृंदा लाल तथा एम्स पटना की ओर से चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्टेट हेल्थ सोसाइटी, बिहार की उप निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. जयती श्रीवास्तव, सहायक निदेशक (विधि) युक्ता सिंह, एम्स पटना के उप निदेशक (प्रशासन) नीलोत्पल बल तथा आपातकालीन चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. दिवेंदु भूषण साक्षी के रूप में उपस्थित रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित