ऋषिकेश , मई 20 -- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश ने राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की है। संस्थान प्रशासन द्वारा कार्यालयी कार्यों और दैनिक गतिविधियों में हिंदी के अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
बुधवार को संस्थान की निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह के दिशा-निर्देशों में उप निदेशक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी (राजभाषा) मुकेश पाल के मार्गदर्शन में हिंदी सेल ने संस्थान परिसर के डिजिटल बोर्डों पर हिंदी संदेशों और प्रेरक वाक्यों का नियमित प्रदर्शन शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आगंतुकों के बीच हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता और अपनत्व की भावना विकसित करना है।
इसके अलावा संस्थान परिसर में विभिन्न स्थानों पर हिंदी के प्रेरक वाक्यों और राजभाषा संबंधी बैनर लगाए जा रहे हैं, ताकि हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा मिल सके। हिंदी सेल में कार्यरत वरिष्ठ हिंदी अधिकारी शशि यादव, कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी नीरज कुमार वर्मा तथा स्वाति कैंतुरा इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
संस्थान में प्रतिदिन व्हाइट बोर्ड पर हिंदी में सुविचार लिखने की पहल भी शुरू की गई है। बताया गया कि इससे कर्मचारियों और विद्यार्थियों के बीच हिंदी के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार होगा।
संस्थान प्रशासन सभी कर्मचारियों को हिंदी में हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित कर रहा है। साथ ही लेटरहेड और कार्यालयी मुहरों के मानकीकरण की दिशा में भी कार्यवाही की जा रही है, ताकि राजभाषा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
ऋषिकेश एम्स ने कहा है कि राजभाषा हिंदी के संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए संस्थान भविष्य में भी ऐसे प्रयास निरंतर जारी रखेगा।
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