मुंबई , जून 21 -- विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने रविवार को विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या पर राज्य सरकार की ओर से आयोजित की जाने वाली पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार करने की घोषणा की।
विपक्ष ने इसके पीछे जनता के गंभीर मुद्दों पर प्रशासन की 'विफलता और असंवेदनशील रवैये' का हवाला दिया है।
संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में एमवीए के वरिष्ठ नेताओं ने सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर राज्य की गंभीर समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने इन समस्याओं में कृषि संकट, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और नशीले पदार्थों के फैलते जाल को शामिल किया है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता भास्कर जाधव ने सरकार से राज्य में 'सूखा' घोषित करने की मांग की। श्री जाधव ने कहा, "सरकार की घोषित कर्ज माफी योजना भ्रामक है, क्योंकि किसानों को जटिल नियमों और शर्तों में फंसाया जा रहा है। एमवीए कृषि ऋणों को पूरी तरह माफ करने की मांग करता है।"विधान परिषद में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने तीखा हमला बोलते हुए वर्तमान शासन को '56 प्रतिशत कमीशन वाली सरकार' करार दिया। श्री पाटिल ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों को बिल पास कराने के लिए भारी कमीशन देने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "ठेकेदारों का एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया हैं। इसके अलावा, बजट कटौती के कारण जल जीवन मिशन के तहत विकास कार्य ठप पड़े हैं और राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर 9.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिससे वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक हो गयी है।"राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) नेता जयंत पाटिल ने राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आयी है। जहां छोटे-मोटे तस्करों को तो पकड़ लिया जाता है, वहीं 'मास्टरमाइंड' खुलेआम घूम रहे हैं। ऐसा लगता है कि नशा तस्करों और पुलिस के बीच सांठगांठ है।"उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि पिछले सत्र में उठाये गये मंदिर भूमि घोटाले पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।
राकांपा (शरद पवार) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने विपक्ष की चिंताओं को दूर करने के बजाय उनका उपहास उड़ाने के लिए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, "हमारे पत्रों के व्याकरण पर टिप्पणी करने के बजाय हमारे ज्ञापन में उठाये गये हर मुद्दे का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।"एमवीए नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि ऐसी सरकार के साथ चाय पार्टी में शामिल होना बिल्कुल अनुचित होगा, जो राज्य के 13 करोड़ नागरिकों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। विपक्ष ने राज्य विधानमंडल के आगामी मानसून सत्र के दौरान इन चिंताओं को आक्रामक तरीके से उठाने का संकल्प लिया है।
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