भोपाल , नवम्बर 2 -- मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 'एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप' का शुभारंभ किया। इस एकीकृत नागरिक सेवा मंच के माध्यम से अब प्रदेश के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाएँ एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने इसे डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में नई क्रांति की शुरुआत बताया।

यह पोर्टल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) के सेंटर फॉर एक्सीलेंस द्वारा विकसित किया गया है। इस प्लेटफॉर्म से नागरिकों, विभागों और सरकारी सेवाओं को एक ही डिजिटल ईको-सिस्टम से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पहल इस विचार को सशक्त करती है कि डिजिटल गवर्नेंस ही गुड गवर्नेंस है।

एमपी ई-सेवा पोर्टल पर नागरिकों को अब विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अलग-अलग वेबसाइट पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। एक ही पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से आवेदन, पात्रता जांच, स्थिति ट्रैक करने से लेकर अनुमोदन तक की सभी प्रक्रियाएँ पूरी की जा सकेंगी। आधार प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल सर्टिफिकेट से सुरक्षित यह प्रणाली पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस है।

एमपी ई-सेवा को राज्य के समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के समग्र पोर्टल से जोड़ा गया है। प्रत्येक परिवार को 8-अंकीय परिवार आईडी और हर सदस्य को 9-अंकीय सदस्य आईडी प्रदान की गई है, जिससे पात्रता की स्वतः पहचान और सेवाओं की ऑटो-वेरिफिकेशन संभव हो सकी है। नागरिकों के लिए ऑटो-फेचिंग डॉक्युमेंट्स की सुविधा भी दी गई है, जिससे पहले से अपलोड किए गए दस्तावेज़ सभी सेवाओं में स्वतः उपयोग हो जाएंगे।

पोर्टल और ऐप का इंटरफेस मोबाइल-फर्स्ट दृष्टिकोण पर तैयार किया गया है। इसमें बहुभाषीय सुविधा और दिव्यांगजन के उपयोग के अनुरूप विशेष डिज़ाइन किया गया है। अनुमान है कि इस प्रणाली से गवर्नेंस लागत में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आएगी और नागरिकों के करीब 5 करोड़ घंटे सालाना बचेंगे।

सितम्बर 2025 की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश ने 1752 ई-सेवाओं को मैप करते हुए सभी 56 अनिवार्य विभागीय सेवाओं को एमपी ई-सेवा पोर्टल में 100 प्रतिशत एकीकृत किया है। इस उपलब्धि के साथ राज्य देश में दूसरा स्थान हासिल कर चुका है। मध्यप्रदेश को इससे पहले सायबर तहसील परियोजना के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार और संपदा 2.0 के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

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