चेन्नई , जून 27 -- असंतुष्ट मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) ने शनिवार को विपक्षी द्रमुक से नौ वर्ष पुराना गठबंधन तोड़ लिया। अब मुख्यमंत्री विजय की सत्तारूढ़ पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (टीवीके) से उसके हाथ मिलाने की उम्मीद है।एमडीएमके महासचिव वाइको की अध्यक्षता में हुई पार्टी की आम परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि टीवीके के साथ गठबंधन करने पर अंतिम फैसला चुनाव के समय ही लिया जायेगा। एमडीएमके ने द्रमुक के नेतृत्व वाले बहुदलीय धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के साथ लगातार चार चुनाव लड़े थे। इस गठबंधन ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों तथा 2021 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दर्ज की थी, लेकिन इस वर्ष अप्रैल में हुए हालिया विधानसभा चुनावों में उसे हार का सामना करना पड़ा।

सीटों के बंटवारे से नाखुश होने के बावजूद एमडीएमके ने हाल ही में संपन्न चुनावों में अनिच्छा से द्रमुक के टिकट पर चार सीटों पर चुनाव लड़ा था और उनमें से दो पर जीत हासिल की थी। मयिलादुथुराई जिले की सीरकाली (आरक्षित) सीट से निर्वाचित दोनों विधायकों में से एक श्री आर सेंथिलसेल्वन ने हालांकि द्रमुक के साथ ही रहने का फैसला किया है। उन्होंने पार्टी छोड़ने के बाद उच्च स्तरीय बैठक से भी दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि वे तकनीकी रूप से द्रमुक के विधायक हैं और वैसे ही रहेंगे तथा अपनी सीट से इस्तीफा नहीं देंगे।

अब जबकि एमडीएमके आधिकारिक तौर पर द्रमुक से अलग हो चुकी है, तो दक्षिणी तेनकासी जिले के कड़यनल्लूर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले उसके एकमात्र विधायक टी एम राजेंद्रन के अपने पद से इस्तीफा देने की उम्मीद है। एमडीएमके के सूत्रों ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुरूप परिषद ने द्रमुक के साथ अपने संबंधों को तोड़ने का संकल्प लिया। गौरतलब है कि राज्य की छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं और यदि एमडीएमके के एकमात्र विधायक भी अपना इस्तीफा सौंप देते हैं, तो 234 सदस्यीय सदन में रिक्तियों की संख्या बढ़कर सात हो जायेगी।

गौरतलब है कि टीवीके की जीत के बाद एमडीएमके भी उसका समर्थन करने की इच्छुक थी। वह ऐसा नहीं कर सकी थी, क्योंकि उसके विधायकों ने द्रमुक के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था और तकनीकी रूप से वे उसी पार्टी के विधायक हैं।

एमडीएमके के भीतर इसे लेकर गंभीर नाराजगी थी और द्रमुक से अधिक सीटों के आवंटन की उम्मीद कर रहे श्री वाइको ने अनिच्छा से मात्र चार सीटों और द्रमुक के चिह्न पर चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को स्वीकार किया था। श्री वाइको और श्री दुरै वाइको ने कुछ मौकों पर खुले तौर पर नाराजगी जाहिर की थी।

उन्होंने द्रमुक पर एमडीएमके को उचित सम्मान न देने का आरोप लगाया, जिसने कई सीटों पर मोर्चे की जीत के लिए कड़ी मेहनत की थी। श्री वाइको बिना नाम लिए द्रमुक के कुछ सहयोगियों जैसे नयी शामिल हुई डीएमडीके (10 सीटें और एक राज्यसभा सीट) को अधिक सीटें दिये जाने और एमडीएमके की उपेक्षा किये जाने पर नाराजगी जता रहे थे। वह द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन के पार्टी चुनाव चिह्न 'लट्टू' पर एक भी सीट पर चुनाव न लड़ने देने और सभी चार सीटों पर द्रमुक के चिह्न पर चुनाव लड़ने के दबाव से भी नाराज थे।

दो दिन पहले श्री वाइको ने श्री विजय को सत्ता में आने से रोकने के लिए अपनी धुर विरोधी अन्नाद्रमुक को सरकार बनाने में समर्थन देने के द्रमुक के कथित कदम की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में खबरें सच हैं, तो इससे बड़ा कोई राजनीतिक धोखा नहीं हो सकता।

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