धनबाद , अगस्त 24 -- झारखंड के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यालय), धनबाद के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान का नाम रोशन किया है।

संस्थान की दो छात्राओं दिव्या उमर और अनन्या दत्ता की टीम ने मिनरल डेवलपमेंट अवेयरनेस प्रोग्राम (एमडीएपी)-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल फर्स्ट टीम का खिताब अपने नाम किया।

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग के एम.एससी. टेक कार्यक्रम की द्वितीय वर्ष की छात्राएं दिव्या उमर और अनन्या दत्ता ने देश के नौ राज्यों से आई 35 टीमों के बीच बेहतरीन प्रदर्शन कर यह उपलब्धि हासिल की।

एमडीएपी-2026 का आयोजन 20 से 23 अगस्त तक ओडिशा के केंदुझार जिले के जोड़ा स्थित खनन एवं औद्योगिक क्षेत्र में किया गया। इस वार्षिक कार्यक्रम का आयोजन सोसाइटी ऑफ जियोसाइंटिस्ट्स एंड एलाइड टेक्नोलॉजिस्ट्स (एसजीएटी) द्वारा किया जाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य जियोसाइंस और इससे जुड़े विषयों के छात्रों को खनिज क्षेत्र में हो रहे नए विकास और व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना है।

इस प्रतियोगिता में दिव्या उमर ने व्यक्तिगत स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और तीसरा स्थान हासिल किया। व्यक्तिगत प्रतियोगिता में चट्टानों, खनिजों और अयस्कों की पहचान, खनन मशीनरी, मेटलर्जिकल प्रक्रियाओं तथा सैटेलाइट इमेजरी की व्याख्या से जुड़े सवाल और गतिविधियां शामिल थीं।

एमडीएपी-2026 के समापन के बाद एसजीएटी के उपाध्यक्ष टी. मोहंता ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग को इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए दोनों छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने बताया कि नौ राज्यों की 35 टीमों की भागीदारी वाले इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की टीम ने ओवरऑल प्रथम स्थान हासिल किया।

दिव्या उमर वर्तमान में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद से एप्लाइड जियोलॉजी में एम.एससी. टेक कर रही हैं। इससे पहले उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से जियोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। वहीं, अनन्या दत्ता भी आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में एप्लाइड जियोलॉजी में एम.एससी. टेक की छात्रा हैं। उन्होंने प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, कोलकाता से जियोलॉजी/अर्थ साइंस में स्नातक की पढ़ाई की है।

इस उपलब्धि पर दोनों छात्राओं को बधाई देते हुए एप्लाइड जियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शुशांत सारंगी ने कहा कि यह सफलता छात्राओं की मजबूत अकादमिक समझ, फील्ड नॉलेज और प्रतियोगितात्मक माहौल में भू-विज्ञान से जुड़े अपने ज्ञान का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता को दिखाती है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित