चंडीगढ़ , मई 16 -- संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने केंद्र सरकार की ओर से खरीफ सीजन 2026 के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को किसानों के लिए अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि एमएसपी में की गई बढ़ोतरी महंगाई और खेती की बढ़ती लागत के मुकाबले बेहद कम है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने यहां किसान भवन में शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार द्वारा घोषित एमएसपी किसी भी स्तर पर किसानों के लिए लाभकारी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी मौजूदा मुद्रास्फीति दर और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते से भी कम है।

उन्होंने कहा कि एमएसपी की घोषणा के तुरंत बाद डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों की लागत और बढ़ गई है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2013 से 2025 तक एमएसपी में औसतन 73 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि खेती की लागत 78 से 90 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। ऐसे में किसानों की आय बढ़ने के बजाय घट गई है और किसानों की आय दोगुनी करने का दावा केवल जुमला साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि कन्याकुमारी से कश्मीर यात्रा के दौरान हजारों गांवों में किसानों की मांगों के समर्थन में प्रस्ताव पारित कराए गए थे, जिनकी प्रतियां जल्द ही राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष को सौंपी जाएंगी।

किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से पाम ऑयल का इस्तेमाल कम करने की अपील का जिक्र करते हुए कहा कि किसान संगठनों ने 2024-25 के किसान आंदोलन के दौरान भी केंद्र सरकार को यही सुझाव दिया था।उन्होंने कहा कि भारत हर साल लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपये पाम ऑयल के आयात पर खर्च करता है। किसान संगठनों ने सरकार से मांग की थी कि पाम ऑयल आयात पर होने वाला खर्च बचाकर किसानों के लिए एमएसपी गारंटी कानून लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

श्री कोहाड़ ने कहा कि यदि सरकार सरसों, सूरजमुखी, तिलहन और दलहन फसलों की एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दे तो देश 2-3 वर्षों में खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है और विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी। उन्होंने केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि एक तरफ सरकार आयात कम करने की बात कर रही है, जबकि दूसरी ओर विदेशी व्यापार समझौतों पर बातचीत जारी है।

उत्तर प्रदेश के किसान नेता दिनेश शर्मा ने कहा कि शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ 17 मई को मेरठ में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) से जुड़े संगठनों की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित