बारां , अप्रैल 04 -- राजस्थान में बारां में वर्ष 2025 की खरीफ फसल अतिवृष्टि से नष्ट होने के बाद अब रबी की मुख्य फसल गेहूं में भी किसानों को प्राकृतिक मार और सरकारी बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान महापंचायत के नेता सत्यनारायण सिंह ने शनिवार को यहां कहा कि वातावरण और जमीन में अधिक नमी के कारण गेहूं का उत्पादन कम हुआ है और दाने भी अपेक्षाकृत बारीक रहे हैं, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक आपदा राहत कोष से मिलने वाला मुआवजा भी अब तक अधिकतर किसानों को नहीं मिल पाया है। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की सरकारी खरीद भी किसानों के लिए "छलावा" साबित हो रही है।
श्री सिंह ने कहा कि अनुमानित कुल आठ लाख टन उत्पादन के मुकाबले सरकारी खरीद का लक्ष्य मात्र 92 हजार टन रखा गया है, जो करीब 11 प्रतिशत ही है। बारां जिले में करीब दो लाख 13 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुवाई की गई थी। जिले में 16 मार्च से 23 खरीद केंद्रों पर खरीद शुरू होनी थी, लेकिन अब तक केवल 11 केंद्र ही चालू हो पाए हैं।
उन्होंने बताया कि कृषि उपज मंडी बारां में अब तक करीब दो लाख टन गेहूं औसत 2300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक चुका है, जबकि एमएसपी इससे करीब 400 रुपये अधिक है। ऐसे में किसानों को मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है।
श्री सिंह ने कहा कि गेहूं खरीद की पंजीयन प्रक्रिया भी अत्यधिक जटिल कर दी गई है, जिससे किसानों को बार-बार ई-मित्र केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पंजीयन के बाद निर्धारित समय का आवंटन और फिर संदेश का इंतजार करना पड़ता है। सप्ताह में केवल पांच दिन ही तुलाई होने और शनिवार-रविवार बंद रखने के निर्णय को भी उन्होंने अव्यावहारिक बताया।
इन समस्याओं को लेकर किसान महापंचायत की ओर से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन रसद अधिकारी एवं एसडीएम विश्वजीत सिंह को सौंपा गया है।
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