नयी दिल्ली , जून 6 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राज्यसभा सांसद संदोष कुमार पी. ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की "हब एंड स्पोक" साइलो योजना और देश की खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था के पुनर्गठन में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

श्री संदोष कुमार ने शनिवार को पत्र लिख कर आरोप लगाया कि एफसीआई द्वारा प्रस्तावित कुछ महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धा-विरोधी सुरक्षा प्रावधानों को नीति आयोग और आर्थिक मामलों के विभाग के हस्तक्षेप के बाद हटा दिया गया। साथ ही, ठेकों के पैकेज आकार बढ़ाने, तकनीकी अनुभव की शर्तों को कमजोर करने और रिवर्स ऑक्शन प्रक्रिया समाप्त करने जैसे बदलावों के कारण कुछ निजी कंपनियों को अत्यधिक लाभ पहुंचा।

पत्र के अनुसार, अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स लिमिटेड और लीप इंडिया फूड एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने कुल 134 में से 110 ठेके हासिल किए, जिनकी अनुमानित कीमत 16 हजार 500 करोड़ है। यह कुल साइलो भंडारण क्षमता का लगभग 77.5 प्रतिशत हिस्सा है। इनमें से अडानी एग्री लॉजिस्टिक्स को पहले चरण के 80 में से 70 ठेके मिले, जिनकी अनुमानित कीमत 7,913 करोड़ है और जिनका विस्तार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और जम्मू सहित प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों तक है।

सांसद ने यह भी कहा कि केंद्रीय वेयरहाउसिंग निगम (सीडब्ल्यूसी) और राज्य वेयरहाउसिंग निगमों (एसडब्ल्यूसी) के गोदामों के संभावित निजीकरण की योजनाओं के बीच ये आरोप और अधिक गंभीर हो जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 250 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले 1,500 से अधिक गोदामों को लंबे समय के लिए निजी कंपनियों को पट्टे पर देने का प्रस्ताव है।

उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण प्रणाली पर कुछ निजी कंपनियों का बढ़ता नियंत्रण न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद, बफर स्टॉक प्रबंधन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है।

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