मुंबई , मार्च 31 -- पश्चिम एशिया संकट और रुपये में जारी तेज गिरावट के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में भारतीय पूंजी बाजार में करीब 1.27 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।

शुद्ध बिकवाली उनके द्वारा लगायी गयी पूंजी और निकाली गयी पूंजी का अंतर है।

केंद्रीय डिपॉजिटरी सेवा कंपनी सीडीएसएल के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने मार्च में पूंजी बाजार से कुल 1,26,991 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की जो अपने-आप में रिकॉर्ड है।

कोरोना काल में मार्च 2020 के बाद यह पहला मौका है जब एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध निकासी की है। मार्च 2020 में जब पहली बार लॉकडाउन लगा था तब एफपीआई ने 1,18,203 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

इक्विटी से एफपीआई ने मार्च में 1,17,775 करोड़ रुपये निकाले जिसका असर शेयर बाजारों पर साफ दिखा। महीने के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही।यह पहला मौका है जब एक ही महीने में इक्विटी में एफपीआई निवेश में एक लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गयी है।

डेट में उनकी शुद्ध बिकवाली 8,469 करोड़ रुपये और म्यूचुअल फंड में 2,616 करोड़ रुपये रही। हाइब्रिड उपकरणों में उन्होंने कुल 1,852 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया।

इससे पहले, फरवरी में एफपीआई ने पूंजी बाजार में शुद्ध रूप से 37,847 करोड़ रुपये लगाये थे जबकि जनवरी में वे बिकवाल रहे थे।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में एफपीआई शुद्ध रूप से बिकवाल रहे हैं। उन्होंने इस दौरान भारतीय पूंजी बाजार से 1,52,741 करोड़ रुपये निकाले हैं। तीन वित्त वर्षों में यह पहला मौका है जब एफपीआई का शुद्ध निवेश नकारात्मक रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में उन्होंने 37,115 करोड़ रुपये और 2023-24 में 3,39,065 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था।

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