नयी दिल्ली , फरवरी 25 -- भारी उद्यम मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने बुधवार को कहा कि विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार संधियों (एफटीए) से देश के इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए नये बाजार खुलेंगे और भारत इस क्षेत्र में विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनेगा।
श्री कुमारस्वामी ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर फिक्की द्वारा यहां आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ई-मोबिलिटी की देश की यात्रा विकसित भारत की यात्रा के अनुरूप है। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे विनिर्माण मजबूत होगा, निर्यात की क्षमता भी बढ़ेगी। पिछले एक दशक में वाहनों के कलपुर्जों का निर्यात आठ अरब डॉलर से बढ़कर 16.9 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती विश्वसनीयता को दर्शाता है।"केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ एफटीए से भारतीय निर्यातकों के लिए नये द्वार खुलेंगे। उद्योग को घरेलू बाजार के साथ निर्यात को मजबूत करने पर भी ध्यान देना चाहिये। उन्होंने कहा, "विकसित भारत 2047 के एजेंडा में इलेक्ट्रिक परिवहन केंद्र में होगा। नीति की स्पष्ट दिशा और औद्योगिक भागीदारी से भारत खुद को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।"उन्होंने देश में इलेक्ट्रिक परिवहन की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक 28 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन बेचे जा चुके हैं। इनमें 20 लाख दुपहिया और तीन लाख तिपहिया वाहन शामिल हैं। तिपहिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 32 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश में इसके लिए विपणन के अवसर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत वाहनों की बैटरी बनाने के लिए 18,000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गयी है और इसके जरिये 50 गीगावाट बैटरी विनिर्माण को सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 40 गीगावाट बैटरी का निर्माण किया जा चुका है।
इसी प्रकार सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण में भी तेजी आयी है। बड़े शहरों के लिए 14 हजार ई-बसों की खरीद को स्वीकृति दी गयी है जिसके लिए 4,389 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। इससे शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
श्री कुमारस्वामी ने महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच को दीर्घावधि में सतत विकास जारी रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा कि ई-परिवहन देश के लिए परिवर्तनकारी होगा। वर्तमान में कच्चे तेल की देश की जरूरत का 85 प्रतिशत आयात किया जाता है। ई-मोबिलिटी से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत को एसेम्बली करने वाले देश से प्रौद्योगिकी में नवाचार करने वाला देश बनने के रास्ते पर चलना होगा। हम पहले ही ई-मोबिलिटी में सबसे तेजी से उभरता हुआ बाजार बन चुके हैं जिसका नेतृत्व दुपहिया और तिपहिया वाहन कर रहे हैं।
उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदारों के लिए वित्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, और कहा कि नीतिगत समर्थन तथा नीति में स्पष्टता इस क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है।
फिक्की ग्रीन मोबिलिटी समिति के सह-अध्यक्ष विक्रम हांडा और गणेश मणि, पीएमआई इलेक्ट्रोमोबिलिटी सॉल्यूशन्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी आंचल जैन तथा फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज भी कार्यक्रम में मौजूद थीं।
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