पटना , अगस्त 02 -- ाज्य भर में पशुओं में होने वाली अत्यंत संक्रामक बीमारी एफएमडी यानी खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए 10 जुलाई से सातवें चरण में टीके लगाए जा रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष में अब तक 79 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। यह टीका पशुओं को मुंह में छाले एवं खुरों में घाव से बचाता है। सरकार की इस पहल से इस वर्ष अब तक 16 लाख से किसान लाभान्वित हुए हैं।

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग एफएमडी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत इस टीकाकरण अभियान को चला रहा है। अभियान के दौरान टीकाकर्मी घर-घर जाकर गाय, बैल, बछड़ा, बछड़ी और भैंसों का टीकाकरण कर रहे हैं।

राज्य सरकार पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए करीब 18 वर्षों से निःशुल्क टीकाकरण अभियान चला रही है। एफएमडी टीकाकरण में राज्य के टॉप तीन जिले पूर्णियां, पटना और पूर्वी चंपारण हैं। पूर्णियां में अब तक करीब 5 लाख 98 हजार, पटना में 4 लाख 89 हजार और पूर्वी चंपारण में 4 लाख 61 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया गया है। पशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के तहत वर्ष 2030 तक एफएमडी रोग को नियंत्रित करने और उन्मूलन करने का लक्ष्य रखा गया है।

एफएमडी टीकाकरण के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2.81 करोड़ पशुओं को टीका लगाया गया है, जिससे 50 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। वर्ष 2006-07 से वृहद पैमाने पर राज्यव्यापी अभियान के रूप में यह टीकाकरण शुरू हुआ था, तब पहले वर्ष में इसकी उपलब्धि 38.45 लाख रही थी।

एफएमडी रोग दुधारू पशुओं जैसे गाय और भैंसों को अधिक नुकसान पहुंचाता है। विषाणुजनित यह रोग पशुओं में अत्यधिक तेजी से फैलता है। इस रोग से पशुधन उत्पादन में भारी कमी आती है, साथ ही देश से पशु उत्पादों के निर्यात पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस बीमारी से देश में प्रतिवर्ष लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान होता है।

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने सभी पशुपालक किसानों से आग्रह किया है कि वे टीकाकर्मियों का सहयोग करें और इस निःशुल्क अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाकर एफएमडी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत या सुझाव के लिए विभाग के टोल फ्री नंबर 1962 पर संपर्क किया जा सकता है।

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